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हाथरस : 24 साल में भी पूरी तरह तैयार नहीं हो सका जिले का बुनियादी ढांचा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले के सृजन को आज 24 वर्ष पूरे हो जाएंगे। 24 साल में भी इस जिले का बुनियादी ढांचा अभी तक खड़ा नहीं हो पाया। अभी कई जिला स्तरीय कार्यालय यहां नहीं है। 24 साल में इस जिले में कोई नगर पंचायत भी सृजित नहीं हुई। महिला थाने को छोड़कर न ही कोई नया थाना बना। मेडिकल कॉलेज भी जिले में नहीं बना।
तीन मई 1997 को इस जिले का सृजन हुआ था। सृजन से भी करीब दो दशक पहले से ही इस जिले को बनाने की जोर-शोर से मांग की जा रही थी। इसकी वजह यह भी थी कि तब हाथरस कानपुर के बाद प्रदेश में दूसरे औद्योगिक क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। जिला बनाने के लिए कई बार आंदोलन भी हुए थे। ऐसे में इस जिले का सृजन हुआ और यहां जश्न भी मनाया गया।
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लोगों को उम्मीद थी कि जिला बनने के बाद यहां का जमकर विकास होगा, लेकिन 24 साल बाद भी इस जिले की कोई खास प्रगति नहीं हुई। जिले में अभी तक जिला न्यायालय का भवन नहीं बना। हालांकि इसके लिए भूमि अधिग्रहीत कर ली गई है। जिले में अभी तक कारागार नहीं है। वैसे इसके लिए भी भूमि अधिग्रहण हो चुका है।
जिले में ओवरब्रिज का निर्माण तो हुआ, लेकिन इसका काम धीमी गति से चल रहा है। काफी प्राचीन हाथरस किला स्टेशन से यहां किसी नई ट्रेन का संचालन नहीं हुआ। किसी नई नगर पंचायत का सृजन नहीं हुआ। जिले में अपना सहकारी बैंक भी नहीं है। कई अन्य आधारभूत जिला स्तरीय सुविधाएं इस जिले के बाशिंदों के पास नहीं हैं।
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कई बाद बदला जा चुका है जिले का नाम
हाथरस। इस जिले ने नाम परिवर्तन और जिला समाप्ति का दंश भी झेला है। वर्ष 2004 में इस जिले को समाप्त भी कर दिया गया था। बाद में वर्ष 2007 में फिर यह जिला बना। इसके अलावा जब हाथरस जिला बना तो इसका नाम महामायानगर किया गया। तदुपरांत जब भाजपा सरकार आई तो इसका नाम हाथरस किया गया। फिर बसपा के शासनकाल में इसका नाम महामायानगर हो गया, लेकिन फिर सपा सरकार ने इसका नाम बदलकर हाथरस कर दिया। ऐसे में इस जिले का नाम भी कई बाद बदला जा चुका है।
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