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हाथरस : जातिगत और धार्मिक आधार पर बिछ रही जीत की बिसात

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संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
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सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में तीसरे चरण में 20 फरवरी को मतदान होना है। मतदान में केवल एक सप्ताह का समय ही बचा है। अब प्रत्याशियों ने जातिगत और धार्मिक आधार पर अपनी जीत की बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। सुबह आठ बजे से रात के एक बजे तक प्रत्याशी हर तरह से अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए माथापच्ची कर रहे हैं।
जातिगत आंकड़ों पर गौर करें तो इस विधानसभा क्षेत्र में जाट समाज के मतदाता सर्वाधिक तादाद में हैं। यदि वर्ष 2017 और 2012 के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो यहां से वर्ष 1991 से 2007 तक जाट समाज से ही विभिन्न दलों से विधायक बनते रहे हैं। भाजपा ने वर्ष 2017 में बसपा के टिकट पर जीते पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक रामवीर उपाध्याय पर दांव लगाया है।
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वहीं रालोद-सपा गठबंधन ने जिला पंचायत सदस्य प्रदीप चौधरी उर्फ गुड्डू को अपना प्रत्याशी बनाया है। बसपा से डॉ. अविन शर्मा मैदान में हैं। हालांकि इनके अलावा कांग्रेस से मथुरा प्रसाद, आम आदमी पार्टी से आरती भट्ट के अलावा ओमवीर सिंह, जितेंद्र, राजेश कुमार, अवधेश, नेम सिंह, प्रवीण कुमार, राजेश चौधरी और शशिकांत सहित कुल 13 उम्मीदवार इस बार मैदान में हैं।
2017 के चुनाव में कुल 14 उम्मीदवार मैदान में थे। बसपा प्रत्याशी रामवीर उपाध्याय को जीत मिली थी। रामवीर को 91,385, राष्ट्रीय लोकदल से डॉ. अनिल चौधरी को 64,775 भाजपा से प्रीती चौधरी को 36,134 और सपा प्रत्याशी देवेंद्र अग्रवाल को 28,980 मत प्राप्त हुए थे। वर्तमान चुनाव में किसान आंदोलन के चलते रालोद-सपा गठबंधन को कितना लाभ मिलेगा, यह तो समय ही तय करेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाता करीब 3.28 लाख थे। वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 3.74 लाख हो गई है। अनुमान के मुताबिक विधानसभा क्षेत्र में जाट मतदाताओं की संख्या लगभग 1,15,000, ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 60 हजार से अधिक है।
जाटव समाज के करीब 50 हजार मतदाता हैं, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 30 हजार है। वहीं बघेल समाज के करीब 22 हजार, क्षत्रिय समाज के करीब 20 हजार, वैश्य समाज के करीब 10 हजार, यादव समाज के करीब 10 हजार, सविता समाज से करीब 7,500, कुशवाहा समाज के करीब 6200, कोरी, खटीक, वाल्मीकि, नट, अहेरिया व अन्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति के करीब 20 हजार मतदाता हैं।
इनके अलावा इस क्षेत्र में कायस्थ, कढे़रा, सुनार, मल्लाह, तेली, जैन, लोधी राजपूत, ओढ़ सहित कई अन्य जातियों के भी काफी मतदाता हैं, जो कि प्रत्याशियों की हारजीत में अहम भूमिका निभाते हैं, क्योंकि अधिकांश प्रत्याशियों का जोर जाट, ब्राह्मण, ठाकुर, मुस्लिम, जाटव, वैश्य, क्षत्रिय और यादव मतदाताओं पर ही रहता है, जबकि अन्य छोटी-छोटी जातियों के वोट भी काफी मायने रखते हैं।
विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1952 से लेकर अब तक कांग्रेस पांच बार, रालोद-बीकेडी के प्रत्याशी उप चुनाव सहित छह बार और भाजपा वर्ष 1991 और 1996 में दो बार, जबकि जनता पार्टी, बसपा व सपा एक-एक बार और एक बार निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।
वर्ष 1952 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर कुंवर अशरफ अली खां, वहीं दूसरे आम चुनाव में वर्ष 1957 में टीकाराम पुजारी निर्दलीय और वर्ष 1962, 67 और 69 में कांग्रेस से कुंवर अशरफ अली खां और वर्ष 1974 में बीकेडी के टिकट पर रामप्रकाश यादव ने जीत हासिल की।
वर्ष 1977 में जनता पार्टी के हुकुमचंद्र तिवारी, वर्ष 1980 में कांग्रेस के कुंवर जावेद अली खां, 1985 और 1989 में जनता दल से कुंवर मुस्तमंद अली उर्फ छाबी मियां तथा 1991 में भाजपा से चौधरी विजेंद्र सिंह, 1993 में जनता दल के चौधरी विशंभर सिंह, वर्ष 1996 में फिर से भाजपा के टिकट पर चौधरी विशंभर सिंह ने जीत हासिल की।
वर्ष 2001 में चौधरी विशंभर सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में रालोद के रामसरन उर्फ लहेटू ताऊ और वर्ष 2002 में रालोद के प्रताप चौधरी, वर्ष 2007 में रालोद के डॉ. अनिल चौधरी, वर्ष 2012 में पहली बार सपा के देवेंद्र अग्रवाल, 2017 में पहली बार बसपा प्रत्याशी रामवीर उपाध्याय सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से विजयी हुए थे।
वर्तमान चुनाव 2022 में मुकाबला रालोद सपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी उर्फ गुड्डू व भाजपा प्रत्याशी रामवीर उपाध्याय और बसपा प्रत्याशी डॉ. अविन शर्मा के मध्य है। चुनाव प्रचार में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी भी पूरा जोर लगा रहे हैं।
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भाजपा प्रत्याशी रामवीर उपाध्याय बीमार होने की वजह से अभी तक मतदाताओं के बीच नहीं पहुंचे हैं, लेकिन भाजपा सूत्रों का कहना है कि एक-दो दिन में रामवीर उपाध्याय जनता के बीच पहुंचेंगे। फिलहाल सभी प्रत्याशी अपने-अपने तरीके से अपनी जीत का गुणा-भाग लगा रहे हैं, लेकिन यह तो 20 फरवरी को अपने वोट की चोट कर मतदाता ही तय करेंगे कि वह किसको जीत का ताज पहनाएंगे और किसको हार का मुंह देखना पड़ेगा।
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