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हाथरस : कम पैदावार से महंगा हो गया ‘खुशबू’ का कारोबार

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चन्द्रपाल सिंह गुलाब किसान। - फोटो : HASAYAN
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संवाद न्यूज एजेंसी, हसायन।
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गुलाब नगरी के नाम से मशहूर क्षेत्र में इस बार गुलाब के फूल की पैदावार कम हुई है। इस कारण फूल के दाम सात से आठ हजार रुपये प्रति मन (40 किग्रा) तक पहुंच गए हैं, जबकि पिछले वर्ष इस सीजन में गुलाब का फूल 2500 रुपये प्रति 40 किलो के हिसाब से बिका था। गुलाब से उत्पाद तैयार करने के लिए दूसरे शहर के कारोबारियों और निर्माताओं ने कस्बे में डेरा जमा दिया है।
वह अस्थायी रूप से फैक्टरियां लगाकर उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। पैदावार कम होने की वजह से कारोबारियों में ज्यादा से ज्यादा फूल खरीदने की होड़ लगी है। यही होड़ इसकी कीमतों को हवा दे रही है। फूल के दाम बढ़ने से इस बार किसानों को तो अच्छा-खासा मुनाफा हो रहा है, लेकिन कारोबारियों के उत्पादन की लागत बढ़ गई है।
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कारोबारियों को चिंता है कि महंगी लागत से बने इत्र, रूह, गुलकंद और गुलाब जल जैसे उत्पादों को बाजार में महंगे दाम पर खपाना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। जानकारों का कहना है कि उत्पाद तैयार करने के लिए गुलाबी रंग का गुलाल हसायन में ही पैदा होता है।
इसी वजह से गुलाब के फूल से उत्पाद बनाने वाले कारोबारी यहां आकर उत्पादन करते हैं। अफसोस की बात तो यह है कि इतनी अच्छी किस्म का गुलाब पैदा करने के बावजूद इससे बने उत्पादों को आज तक हसायन की पहचान नहीं मिली है। किसान भी चाहते हैं कि जब उत्पाद हसायन के गुलाब से बनते हैं तो इन पर छाप भी हसायन की ही लगनी चाहिए।
क्षेत्र की आव-ओ-हवा और मिट्टी के कारण यहां जैसा गुलाबी गुलाब व्यापारियों को कहीं नही मिल पाता है। वर्तमान में गुलाब के फूल की पैदावार कम हुई है। व्यापारियों में फूल खरीदने की होड़ लगी है।
-मुकेश कुमार, किसान
गुलाब के फूल की पैदावार कम होने के कारण पिछले सीजन की अपेक्षा फूल के दाम इस बार बढ़िया मिल रहे हैं। व्यापारी चैत्र के सीजन में स्टॉक भी पूरा नहीं कर पाए। अब वह रेट बढ़ाकर अपना माल तैयार कर रहे हैं।
-चंद्रपाल, किसान
गुलाब का कारोबार कस्बा हसायन में होने के बाद भी आज तक किसी भी व्यापारी के द्वारा हसायन में इत्र कारोबारी के लिए फैक्ट्री संचालित करने के उपरांत भी हसायन के नाम को आज तक बढावा नही मिल पाया है।
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-विजयपाल, किसान
इत्र कारोबारी किसानों की फसल की पैदावार को देखकर हर वर्ष कीमत में उतार-चढ़ाव पैदा कर देते हैं। गुलाब की फसल कभी मुनाफा तो कभी घाटा दे जाती है। चैत्र मास के सीजन से दाम फिर भी कम हैं।
-हरिओम शंकर, किसान
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