न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले के विकास खंड सिकंदराराऊ और सासनी में विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा किए गए सर्वेक्षण में आम के बाग में न्यूनतम मात्रा में कीट रोग के लक्षण देखे गए हैं। कृषि विभाग ने इससे बचाव के लिए किसानों को सतर्क करना शुरू कर दिया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी (पीपीओ) राजेश कुमार ने इसे लेकर सलाह भी जारी है।
पीपीओ ने कहा है कि आम के पेड़ों पर भुनगा कीट (मेंगो हापर) छोटा तिकोने शरीर वाला आम का सबसे विनाशकारी कीट है। इससे बचाव के लिए क्यूनाल फास 25 ईसी दर 2 मिली प्रति लीटर पानी में, डाईमेथोएट 30 ईसी 2 मिली प्रति लीटर पानी में डालें। मिली बग कीट की प्रौढ़ मादा सफेद, चपटी, मोटी, अंडाकार और पंखहीन होती है। इसके शिशु कीट और प्रौढ़ मादा कोमल शाखाओं व वृंतों का रस चूसते हैं और चिपचिपे पदार्थ का विसर्जन करते हैं। इस पर काली फफूंदी उग आती है।
इसके बचाव के लिए ब्युप्रोफेजिन 25 प्रतिशत एससी दो मिली प्रति लीटर पानी में, क्यूनाल फास 25 ईसी दर दो मिली प्रति लीटर पानी में डालें। वहीं पाउडरी मिल्डयू रोग ओडियम मैंजीफेरी नामक फफूंद से उत्पन्न होता है। इसमें पुष्प वृंत छोटे-छोटे अविकसित फल एवं उनके वृंत सफेद चूर्ण से ढक जाते हैं। छोटे-छोटे फल पीले पड़कर सूखकर गिर जाते हैं। इससे बचाव के लिए फफूंदी नामक सल्फर 80 प्रतिशत डब्लूपी अथवा मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से या घुलनशील गंधक दो ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। संवाद