न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
खुले में प्रसव के मामले में कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) द्वारा गठित कमेटी ड्यूटी पर तैनात स्टाफ के अलावा महिला के परिजनों के बयान भी दर्ज कर रही है।
उल्लेखनीय है कि कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के गांव नगला सिंघी सात बरामई निवासी सनेश की पत्नी कल्पना देवी को बृहस्पतिवार की सुबह प्रसव पीड़ा होने पर परिजन जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन महिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया और प्रसव कराने के नाम पर रुपये मांगे। रुपये न देने पर वहां से उसे भगा दिया गया।
परिजन जब उसे अन्य कहीं प्रसव के लिए अस्पताल से लेकर जा रहे थे तो महिला को प्रसव पीड़ा ज्यादा होने लगी और वह वहीं पर खुले आसमान के नीचे बैठ गई। यह देखकर उसके साथ मौजूद महिलाओं ने कपड़े से महिला के चारों ओर घेरा बनाया और खुले में महिला का प्रसव कराया।
आरोप है कि महिला का पति इस दौरान स्वस्थ्य कर्मियों से गुहार लगाता रहा कि उसकी पत्नी ने अस्पताल के बाहर बच्चे को जन्म दिया है, उसे वहां से उठवाएं। इस पर काफी देर के बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने इस ओर ध्यान दिया और फिर नवजात शिशु और प्रसूता को वार्ड में पहुंचाया गया, लेकिन कुछ देर बाद ही उसे छुट्टी भी दे दी गई।
इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को हुई तो इस मामले की विभागीय जांच शुरू करा दी गई। इस मामले में चिकित्सक और उस वक्त ड्यूटी पर तैनात पूरे स्टाफ की जांच की जा रही है। प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेश गोयल ने बताया कि इस मामले की जांच सीएमओ द्वारा गठित कमेटी कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। महिला के परिवार के लोगों के भी बयान लिए जा रहे हैं। संवाद