हाथरस : ट्रेन से कटकर स्टेशन मास्टर की मौत के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारी। संवाद
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)।
क्षेत्र के एकमात्र रेलवे स्टेशन जलेसर रोड (मानिकपुर) में कार्यरत राजस्थान के करौली निवासी 54 वर्षीय स्टेशन मास्टर मदनलाल मीणा की शुक्रवार की शाम करीब सवा छह बजे मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर काफी भीड़ जमा हो गई। हादसा उस वक्त हुआ, जब स्टेशन मास्टर रेलवे लाइन को पार कर स्टेशन की दूसरी ओर सामान खरीदने के लिए जा रहे थे। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। परिजनों को भी सूचना दे दी गई थी। खबर लिखने तक उनके आने का इंतजार किया जा रहा था।
स्टेशन मास्टर दिल्ली-हावड़ा रेल लाइन को पार करने के बाद प्लेटफॉर्म संख्या दो के नजदीक से गुजर रही डेडिकेट फ्रेट कॉरिडोर की लाइन को पार कर रहे थे। तभी वह हावड़ा से दिल्ली की ओर जाने वाली एक मालगाड़ी की चपेट में आ गए। मालगाड़ी उनको घसीटते हुए 300 मीटर दूर तक ले गई। मालगाड़ी की चपेट मेें आने पर उनके शरीर के चिथड़े उड़ गए।
रेलवे कर्मचारी और मौके पर पहुंची राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) उनके शव के टुकड़ों को इकट्ठा करने में जुट गई। स्टेशन मास्टर की मौत की सूचना पर रेलवे के कुछ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्टेशन पर ड्यूटी कर रहे स्टेशन मास्टर अपने वरिष्ठ अधिकारी की मौत पर इतने भावुक हो गए कि वह किसी भी बात का सही तरह जवाब भी नहीं दे सके। स्थानीय पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच गई। संवाद
फुट ओवरब्रिज की कमी बनी हादसे का कारण
सहपऊ। क्षेत्र के गांव मानिकपुर (जलेसर रोड) रेलवे स्टेशन पर रेलवे लाइन पर फुट ओवरब्रिज नहीं होना भी हादसे की वजह माना जा रहा है। इस स्टेशन पर पहले एक से दूसरे स्टेशन प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के लिए फुट ओवरब्रिज बना था। करीब आठ वर्ष पूर्व एक मालगाड़ी की चपेट में आने पर वह फुट ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया। रेलवे ने किसी दुर्घटना से बचने के लिए उस पुल को वहां से हटा दिया। ग्रामीणों में इस बात को लेकर काफी गुस्सा था कि रेलवे द्वारा फुट ओवरब्रिज नहीं बनाने से एक कर्मचारी को जान गंवानी पड़ी। जब उनको एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाना होता है तो उनको रेलवे लाइन पैदल पार करनी पड़ती है। वैसे रेलवे के नियमों के मुताबिक रेलवे लाइन को पैदल पार करना अपराध है। यात्रियों को उस समय काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जब लूप लाइन पर खड़ी किसी गाड़ी को पार कर उनको अपनी ट्रेन पकड़नी पड़ती है। इधर, डेडिकेट फ्रेट कॉरिडोर की लाइन बिछने के बाद तो और भी समस्या खड़ी हो गई है। संवाद