न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
बदहाल सिस्टम ने एक और जान ले ली। 75 वर्षीय एक वृद्ध को लेकर उनका बेटा करीब 12 घंटे तक जिले के एक अस्पताल से लेकर दूसरे अस्पताल तक भागता रहा लेकिन वह उन्हें बचा नहीं सका। ऑक्सीजन की किल्लत के चलते वृद्ध ने अस्पताल के गेट पर ही उपचार के अभाव में अपने बेटे की आंखों के सामने दम तोड़ दिया। विधायक से लेकर कई अन्य जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों के बाद भी उन्हें अस्पताल में भर्ती तक नहीं किया जा सका।
वाकया सासनी के गांव फिरोजपुर के प्रधान सतीश कुमार के पिता सोबरन सिंह के साथ हुआ। सतीश कुमार के पिता की तीन दिन पहले हालत बिगड़ी तो वह उन्हें लेकर सासनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां सोबरन सिंह का ऑक्सीजन लेबल कम हो गया तो उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया। जिला अस्पताल की ओपीडी बंद होने के कारण उन्हें इमरजेंसी वार्ड में दाखिल कराया गया। वहां थोड़ी देर ही उन्हें ऑक्सीजन मिल सकी। इस दौरान उनकी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई जिसके बाद उन्हें बागला अस्पताल परिसर में बने एमडीटीबी अस्पताल के लिए भेज दिया। लेकिन, अस्पताल ने उन्हें फटकार कर भगा दिया।
सतीश ने बताया कि अस्पताल के बाहर वह करीब एक घंटे तक अपने पिता को स्ट्रेचर पर लेकर खड़े रहे लेकिन उन्हें भर्ती नहीं किया। इसके बाद वह अपने पिता को सासनी के निकट स्थिति एबीजी अस्पताल ले गए। इस दौरान ऑक्सीजन का लेबल और कम हो गया। वहां भी ऑक्सीजन न होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया। पिता की हालत बिगड़ती देख फिर सतीश उन्हें लेकर एमडीटीबी अस्पताल पहुंचे। वहां दरवाजा बंद था। वह दरवाजा खटखटाते रहे लेकिन किसी ने नहीं खोला।
अपने पिता की हालत बिगड़ती देख सतीश इसके बाद मुरसान के कोविड अस्पताल पहुंचे। वहां भी ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो सकी। वहां चिकित्सक ने उन्हें नयति अस्पताल मथुरा ले जाने की सलाह दे दी। वह उन्हें मथुरा ले जा रहे थे कि इसी दौरान उनके पिता ने दम तोड़ दिया। सतीश प्रधान का कहना है कि वह 12 घंटे तक इधर से उधर भटकते रहे लेकिन किसी ने उपचार नहीं किया। वह डॉक्टरों से कहते रहे कि कोई इन्हें दवा तो दे, कुछ तो करे लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। मेरे पिता ने मेरी आंखों के सामने ही प्राण त्याग दिए।