न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
क्षेत्र में खाद्य सामग्री में मिलावट के साथ ही बड़े पैमाने पर की जा रही घटतौली से उपभोक्ताओं की जेब पर डाका पड़ रहा है। संबधित विभाग सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रहा है। बड़ी तादाद में ऐसे दुकानदार हैं, जिन्होंने लंबे समय से कांटों पर मोहर नहीं लगवाई है। इतना ही नहीं नियमों को दरकिनार कर ईंट व पत्थर के बांट से होती तोल की जा रही है।
संबधित विभाग द्वारा शायद ही कभी कोई बड़े स्तर पर कांटा व बांट की जांच के लिए कोई मुहिम चलाई गई हो, जिसका नतीजा यह है कि ऐसे विक्रेताओं की कमी नहीं है जो कांटा व बांट का इस्तेमाल कई साल से बगैर बांट माप विभाग की मोहर लगवाए ही कर रहे हैं। बांट की जगह ईंट व पत्थर के बांट का इस्तेमाल भी बेरोकटोक कर रहे हैं। जिनकी कोई गारंटी नहीं होती कि उनका असली वजन क्या है।
हर दो साल में लगनी चाहिए मोहर
नियम तो यह है कि बांट तराजू व इलेक्ट्रोनिक वेट मशीन कांटा की जांच होती है। हर दूसरे साल बांट पर मोहर लगती है। इलेक्ट्रोनिक कांटे पर जांच के बाद टैग सील लगती है, लेकिन बाजार में बड़ी संख्या में बिना मोहर के बांट व बिना नवीनीकरण टैग के कांटे इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
डिब्बे के साथ तोली जा रही मिठाई
नए आदेश के तहत अब मय डिब्बे के मिठाई नहीं तोली जाएगी। लेकिन इस आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। कस्बा व क्षेत्र में अधिकतर दुकानदार मिठाई के साथ ही डिब्बे को तोल रहे हैं।
बांट माप निरीक्षक को नियमानुसार कांटे बांट की जांच के लिए निर्देश दिए जाएंगे। ग्राहकों के साथ किसी भी प्रकार की घटतौली नहीं होने दी जाएगी।
-राजेश कुमार, एसडीएम