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हाथरस : ऐतिहासिक किला राजा दयाराम की जमीन पर बढ़ रहा अवैध कब्जों का दायरा

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हाथरस : किला स्थित पुरातत्व विभाग की जमीन पर अतिक्रमण। - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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शहर की ऐतिहासिक धरोहर किला राजा दयाराम व मंदिर श्रीदाऊजी महाराज की जमीन पर लगातार अवैध कब्जे हो रहे हैं। पुरातन महत्व के इस स्थल का अस्तित्व संकट में है। अंग्रेजों से हुई जंग के साक्षी रहे इस किले की 40 फीसदी से ज्यादा भूमि पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। किले के सौंदर्यीकरण के लिए कई बार योजनाएं भी बनाई जा चुकी हैं, लेकिन यह योजनाएं कागजों में ही सिमटकर रह गईं। ऐसे में किला क्षेत्र दिन-प्रतिदिन संकुचित होता जा रहा है और यहां के ऐतिहासिक टीलों का भी क्षरण होता जा रहा है। शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन व नगर पालिका की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं, लेकिन यहां की करीब साढ़े तीन एकड़ भूमि पर अवैध कब्जों का यह दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
किला राजा दयाराम और मंदिर श्रीदाऊजी महाराज ऐतिहासिक स्थल हैं। 1817 में अंग्रेजों से तीन दिन तक चले युद्ध का यह किला साक्षी है। इस युद्ध के निशां मंदिर पर आज भी देखे जा सकते हैं। करीब ढाई दशक से किला क्षेत्र में लगातार अवैध कब्जे हो रहे हैं। एक तरफ सरकार यह कह रही है कि मंदिरों के पास से अतिक्रमण व अवैध कब्जों को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।
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वहीं दूसरी ओर किला राजा दयाराम व मंदिर श्रीदाऊजी महाराज परिसर में करीब 600 लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। कब्जे के अलावा यह लोग बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी लैस हो गए हैं। नगर पालिका द्वारा इनको पानी का कनेक्शन मुहैया करा दिया गया। बिजली विभाग ने इनको बिजली के कनेक्शन दे दिए, इसलिए ये लोग आराम से रह रहे हैं।
पहले पशुओं का सहारा, फिर कर लेते हैं पक्का निर्माण
यहां खाली पड़ी पुरातत्व विभाग की भूमि पर कब्जे के लिए मवेशियों का सहारा लिया जाता है। भैंस और बकरी आदि मवेशियों को बांधा जाता है। उसके बाद छप्पर व टिन आदि डाली जाती है। उसके अंदर ही अंदर पक्का निर्माण कर लिया जाता है। इसी तरह से अतिक्रमण दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है।
साल में दो बार वापस लौटी पुरातत्व टीम
पुरातत्व विभाग की टीम सर्वे के लिए दो बार आई। बताते हैं कि टीम को स्थानीय प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। इस कारण टीम दो बार लौट गई। अब पुरातत्व विभाग ने फिर से दो दर्जन से अधिक कब्जा करने वाले लोगों की सूची प्रशासन को सौंपी है। इस क्षेत्र में कई गांव सभा के मजरों की भूमि लगती है। ऐसे में पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन इस भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई एक-दूसरे पर टालते हैं। नतीजा, अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है।
अवैध कब्जों को नहीं किया चिन्हित
किला क्षेत्र में अतिक्रमण की शिकायत जिला प्रशासन के अधिकारियों के अलावा सीएम पोर्टल पर भी पहुंच गई है। इसके बावजूद आज तक अतिक्रमण करने वालों को चिन्हित नहीं किया गया है। किला परिसर में करीब साढ़े तीन एकड़ भूमि पर कब्जा है। इस भूमि की कीमत करोड़ों रुपये है। इसके बाद पुरातत्व विभाग व जिला प्रशासन एक-दूसरे पर टालकर इस भूमि को कब्जामुक्त नहीं करा रहे हैं। ऐसे में कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट और शासन के निर्देश हैं कि सार्वजनिक धार्मिक स्थलों से अतिक्रमण हटाए जाए। इसके लिए हर स्तर पर कमेटी बनी हुई है। इतने के बाद भी दुर्भाग्य यह है कि दो बार हाईकोर्ट से निर्देश जारी होने के बावजूद यहां से न तो अवैध कब्जे हटवाए गए हैं और न ही अतिक्रमण। पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि संयुक्त रूप से कार्रवाई की जाए।
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-हरीश कुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
- किला क्षेत्र में अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। 40 अवैध कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। नोटिस का जवाब मिलने के बाद इनके कब्जों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
-प्रेमप्रकाश मीणा, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
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