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हाथरस : साप्ताहिक बाजार से वसूले गए 3.20 लाख रुपये पचा गए कर्मी

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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नगर पालिका परिषद द्वारा ढकपुरा रोड पर लगने वाले अस्थायी व साप्ताहिक बाजार में व्यवसाय करने वाले दुकानों से किराये व लाइसेंस शुल्क की रकम पिछले चार माह से नगर पालिका के कोष में जमा न होने का मामला सुर्खियों में आ गया है। पिछले चार माह में 3.20 लाख रुपये का नगर पालिका के कुछ कर्मियों द्वारा गबन की जांच कराने को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा ने अधिशासी अधिकारी (ईओ) से जवाब मांगा है। इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी (डीएम) व अपर जिलाधिकारी (एडीएम) से भी की है।
नगर पालिका परिषद हाथरस द्वारा ढकपुरा रोड पर लगने वाले अस्थायी व साप्ताहिक मार्केट में व्यवसाय करने वाले दुकानदारों से लाइसेंस शुल्क व किराये की वसूली की जाती है। इसे लेकर एक पालिका के कुछ कर्मियों द्वारा गबन किए जाने को मामला सुर्खियों में आया है। इसे मामले को लेकर नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा ने ईओ को पत्र जारी किया है।
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पालिकाध्यक्ष ने कहा है कि माह फरवरी के बाद से नगर पालिका परिषद के कोष में कोई भी धनराशि नहीं जमा की गई हैं, जबकि प्रत्येक सप्ताह रविवार को बाजार बदस्तूर लग रहा हैं। बाजार से प्रत्येक सप्ताह वसूली भी की जा रही है, परंतु वह पालिका कोष में जमा नहीं हो रही हैं। इस संबंध में मार्केट में व्यापार करने वाले कई दुकानदारों ने उन्हें अवगत कराया है कि पालिका के कर्मचारी पैसे ले जाते है, परंतु रसीद नहीं देते हैं। इस बाबत जब लेखाकार से पूछा गया तो ज्ञात हुआ कि 14 फरवरी के बाद रविवार बाजार की कोई भी धनराशि कैशबुक में नहीं है।
उन्होंने कहा है कि इस बाजार में वसूली के लिए तैनात कर्मचारियों द्वारा सरकारी धन का गबन और हेराफेरी की जा रही है। यह भी स्पष्ट है कि कर अधीक्षक द्वारा भी उपरोक्त राजस्व वसूली का कोई भी पर्यवेक्षण नहीं किया जा रहा है। पिछले चार माह से इस मद में कोई भी धनराशि प्राप्त न होने पर वसूली कार्य में तैनात कर्मचारियों से न तो कोई स्पष्टीकरण लिया गया है और न ही कोई आख्या प्रस्तुत की गई है, जबकि ईओ एवं कर अधीक्षक को लगातार पत्रों व मौखिक रूप से इस विषय पर कई बार अवगत भी कराया जा चुका है।
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पालिकाध्यक्ष ने बताया कि प्रति सप्ताह लगभग 200 दुकानें लगती हैं। प्रत्येक दुकान से 100 रुपये प्रति सप्ताह की दर से लाइसेंस शुल्क व किराया निर्धारित है। इस प्रकार विगत चार माह में लगभग 3,20,000 रुपये की वित्तीय अनियमितता व हेराफेरी की गई है। इसे लेकर पालिकाध्यक्ष ने ईओ से जवाब मांगा है। संवाद
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