न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शहर से सटे नगला चौबे में सड़क जगह-जगह से टूटी पड़ी है। पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इस कारण लोगों को मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद भी अभी सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम की किसी ने सुधि नहीं ली है। सभासद ने प्रयास किया तो नगर पालिका में बजट की कमी हो गई। इस कारण यहां के बाशिंदे आज भी मूलभूत सुविधाओं के मोहताज हैं।
उल्लेखनीय है कि सीमा विस्तार के साथ 11 ग्राम पंचायतें नगर पालिका की सीमा में शामिल हो गईं। इसके साथ ही नगर पालिका क्षेत्र की आबादी भी 2.02 लाख तक पहुंच गई है। क्षेत्रफल भी 40 वर्ग किलोमीटर हो गया है। शहर से सटा गांव नगला चौबे भी इनमें से एक है। नगर पालिका की सीमा में शामिल होने के तीन साल बाद भी इस इलाके की बदहाली दूर नहीं हो सकी है। यहां सड़कें जर्जर हालत में हैं।
पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इस कारण जरा सी बारिश होने से सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम भी बदहाल है। इस कारण लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। कई बार क्षेत्रीय लोगों ने नगर पालिका से सुविधाएं देने की मांग की, लेकिन उसमें बजट की कमी आड़े आ गई। संवाद
गांव की सड़क जगह-जगह जर्जर हालत में है। पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इस कारण खासी मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। नगर पालिका द्वारा सुविधाओं पर कतई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
-राकेश वर्मा
पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण जरा सी बारिश में सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। नगर पालिका को पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए, ताकि जलभराव न हो।
-योगेश कश्यप
नगर पालिका में शामिल होने के बाद आज तक विकास कार्य के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। इसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सफाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
-दिलीप कुमार
पहले ग्राम प्रधान से कहकर काम करा लिया करते थे। अब नगर पालिका की ओर से सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम की आज तक सुधि नहीं ली गई है। सड़क टूटी है। पानी की निकासी के इंतजाम नहीं हैं।
-मोहित शर्मा