कस्बा मेंडू में बड़े स्तर पर है रबड़ी-खोवे का कारोबार
शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी रबड़ी व खोवा का कारोबार बड़े स्तर पर होता है। इसमें कस्बा मेंडू काफी अहम है। यहां के दुकानदारों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर भैंसों की खरीद कर दूध मंगाया जाता है, ताकि गुणवत्ता बेहतर रह सके। यहां से अभी तक हर रोज करीब पांच क्विंटल रबड़ी व खोवा दिल्ली भेजा जाता है, जबकि हाथरस शहर से करीब दो क्विंटल रबड़ी हर रोज दूसरे शहरों में जाती है।
300 से 360 रुपये किलो हैं रबड़ी के दाम
जिले में रबड़ी के दाम 300 रुपये प्रति किलो से लेकर 360 रुपये प्रति किलो तक हैं। शहरी क्षेत्र में रबड़ी करीब 360 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र से दिल्ली व अन्य शहरों में जाने वाली रबड़ी के थोक दाम गुणवत्ता के हिसाब से 300 से 350 रुपये किलो तक हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री को भी पसंद थी हाथरस की रबड़ी
हाथरस की रबड़ी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी बहुत पसंद थी। वह इसके मुरीद थे और कई बार यहां आकर इसका स्वाद ले चुके थे। खासकर हास्य सम्राट काका हाथरसी के आमंत्रण पर वह 1994 में हाथरस आए थे और यहां की रबड़ी का स्वाद लिया था, इस बात का जिक्र उन्होंने मंच से भी किया था। एक कवि के रूप में भी अटलजी यहां कई मंचों पर आए। वर्ष 1994 में काका हाथरसी पुरस्कार समारोह में भी वह मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने डॉ. राकेश शरद व भगवत शरण शर्मा को काका हाथरसी पुरस्कार से सम्मानित किया था। इस दौरान वह पूर्व पालिकाध्यक्ष रमेशचंद्र आर्य के आवास पर रुके। भोजन में उन्हें हाथरस की रबड़ी पसंद आई थी। इससे पहले भी अटल जी यहां अक्सर आते रहते थे।