जनपद में रबड़ी के दाम 300 रुपये प्रति किलो से लेकर 360 रुपये प्रति किलो तक हैं। शहरी क्षेत्र में रबड़ी करीब 360 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। जबकि देहातों से दिल्ली आदि जाने वाली रबड़ी के थोक दाम गुणवत्ता के हिसाब से 300 से 350 रुपये किलो तक हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री को भी पंसद थी हाथरस की रबड़ी
हाथरस की रबड़ी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी बहुत पसंद थी, वे इसके मुरीद थे और कई बार यहां आकर इसका स्वाद ले चुके थे, खासकर हास्य सम्राट काका हाथरसी के आमंत्रण पर वे 1994 में हाथरस आए थे और यहां की रबड़ी का आनंद लिया था, इस बात का जिक्र उन्होंने मंच से भी किया था। एक कवि के रूप में भी अटलजी यहां कई मंचों पर आए। वर्ष 1994 में काका हाथरसी पुरस्कार समारोह में भी वह मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने डॉ. राकेश शरद व भगवत शरण शर्मा को काका हाथरसी पुरस्कार से सम्मानित किया था। इस दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष रमेशचंद्र आर्य के आवास पर रुके। भोजन में उन्हें हाथरस की रबड़ी पसंद आई थी। इससे पहले भी अटल जी यहां अक्सर आते रहते थे।
हमारे यहां करीब 50 साल से रबड़ी व खोवा का काम हो रहा है। हम लोग दिल्ली तक माल भिजवाते हैं, लेकिन यह काम काफी जटिल है। अगर सरकार इसे प्रोत्साहन देगी तो हमारा व हमारे जनपद का नाम और अधिक विख्यात होगा।-रविकांत गुप्ता, बाबा शादी लाल रबड़ी वाले, मेंडू।
हमरी रबड़ी व खोवा शहर की रबड़ी व खोवा से काफी अलग है, क्योंकि हम अपने माल के लिए दूध खुद ही कढ़वाते है, यानि हमारे लोग खुद अपने सामने आसपास के गांव से दूध लाते हैं, ताकि उसमें मिलावट न हो। मुख्यमंत्री की पहल से शुद्धता को भी बढ़ावा मिलेगा।-विनोद गुप्ता, लाला मुन्नी लाल रबड़ी वाले।