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हाथरस: होम क्वारंटीन कर खुद व परिवार को कोरोना संक्रमण से बचा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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कोरोना संक्रमण के इस दौर में आइसोलेशन और क्वारंटीन यह दो शब्द तेजी से उभरे हैं। कोरोना वायरस से बचने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग उन सभी लोगों को क्वारंटीन की सलाह देती है, जो विदेश अथवा किसी दूसरे राज्य की यात्रा करके आए हों या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों। क्वारंटीन के दौरान संबंधित व्यक्ति को भी 14 दिन तक देखभाल में रखा जाता है।
इस दौरान उसे आवश्यक उपचार व डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं। प्रत्येक जिले में जगह-जगह पर क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। इसके अलावा होम क्वारंटीन होने के लिए कोई व्यक्ति अपने घर का एक कमरे का चुनाव भी कर सकता है, ताकि वह स्वस्थ लोगों से दूर रह सके। होम क्वांटीन के जरिये आप खुद को और अपने परिवार को कोरोना के संक्रमण से बचा सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी कर होम क्वारंटीन के बारे में लोगों को जानकारी दी है।
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आइसोलेशन और क्वारंटीन में अंतर
हाथरस। आइसोलेशन उस व्यक्ति को किया जाता है जो कोरोना वायरस संक्रमित हो जाता है और उसके संक्रमण होने की पुष्टि डॉक्टर द्वारा कर ली जाती है। आइसोलेशन के दौरान उन्हें पूरी तरह की सुविधा दी जाती है, उनका ख्याल रखा जाता है और साथ ही उन्हें सभी प्रकार की दवाइयां देकर स्वस्थ करने की प्रक्रिया 14 दिन तक अपनाई जाती है। आइसोलेशन वार्ड घर से दूर किसी एकांत स्थान पर होते हैं।
आइसोलेशन में उस मरीज को रखा जाता है, जो संक्रमित होता है, वहां उसका इलाज होता है। कोरोना से बचाव के लिए जागरूक होना बेहद जरूरी है।
-डॉ. बृजेश राठौर, सीएमओ
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