सिकंदराराऊ की छवि पर कलंक लगते-लगते रह गया
हंगामे की पुनरावृत्ति को लेकर आशंकित नजर आए लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
सिकंदराराऊ (हाथरस)। जामा मस्जिद पर ज्ञापन देने के नाम पर हुए बवाल के बाद नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। लोग कह रहे हैं कि सिकंदराराऊ की गंगा-जमुनी संस्कृति को कलंक लगते-लगते रह गया।
लोगों की चर्चाओं का प्रमुख बिंदु नगर के लोगों का आपसी मेल जोल सांप्रदायिक माहौल रहा। श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर हुए आंदोलन से लेकर अभी तक कई और ऐसे मौके आए, लेकिन लोगों ने आपसी सूझबूझ का परिचय देते हुए माहौल को बिगड़ने नहीं दिया। कुछ लोगों का कहना है कि यह नगर के माहौल को बिगाड़ने कुत्सित प्रयास था, जो कि सफल नहीं हो पाया। यह भी सही है कि सीएए तथा एनआरसी को लेकर देश के अनेक हिस्सों में एक हिंसा का अभियान सा चल रहा है।
लोग समझ ही नही पा रहे हैं कि सीएए तथा एनआरसी क्या है। इससे देश में वर्षों से रह रहे लोगों को क्या नुकसान है। विरोध करने वाले बस यही कह रहे हैं कि यह कानून गलत है। नगर के लोगों का कहना है कि यह सांप्रदायिक मामला नहीं था, बल्कि देश के अन्य भागों की तरह सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाना और पुलिस पर हमला करने का प्रयास था। घटना के बाद नगर के लोग सामान्य दिखे, जो मुस्लिम समाज की दुकानें बंद कराई गई थीं, वह खुल गईं। कुल मिलाकर ऊपर से तो सब सामान्य नजर आया, लेकिन जो हुआ, अचानक हुआ। उसकी पुनरावृत्ति न हो जाए, इसको लेकर चिंता है।