अभियोजन ने बताया कि विनोद पर आगरा, मथुरा, झांसी, हाथरस में 18 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं और वह अक्टूबर 2024 से हमीरपुर जेल में बंद है, कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
कुख्यात विनोद जाट की जमानत याचिका हाथरस एडीजे कोर्ट प्रथम ने खारिज कर दी है। विनोद जाट व उसके साथियों के खिलाफ भाजपा नेता गरुणध्वज सिंह को धमकाने व रंगदारी मांगने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। प्रकरण में चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोप ने जमानत के लिए अर्जी डाली थी।
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घटना दो साल पुरानी है। गरुणध्वज ने 28 जून 2024 को मुरसान कोतवाली में विनोद जाट व उसके छह साथियों के खिलाफ धमकाने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। एफआईआर के अनुसार गरुण की मुरसान रेलवे स्टेशन के सामने किला खाई के नाम से जमीन है, जिसका आरोपियों ने परिवार के ही व्यक्ति से गलत तरीके से बैनामा करा लिया था।
आरोप है कि बाद में इसमें हिस्ट्रीशीटर विनोद जाट को शामिल कर लिया और फोन पर धमकियां दिलवाईं। जान से मारने की धमकी दी औश्र जमीन पर काम करने के एवज में 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। इसके बाद 24 जून 2024 को विनोद जाट अपने साथियों संग हथियारों से लैस होकर नगर पंचायत मुरसान कार्यालय पहुंचा और गरुणध्वज को धमकाया। इस घटना की पुष्टि कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज से भी हुई है।
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18 से अधिक मुकदमे दर्ज
विनोद जाट अक्तूबर 2024 से हमीरपुर जेल में अन्य मामले में बंद है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने उसे इस प्रकरण में निर्दोष बताया, एफआईआर पर सवाल उठाए और जमानत देने की अपील की। अभियोजन पक्ष ने विरोध करते हुए अदालत को बताया कि अभियुक्त विनोद जाट के खिलाफ आगरा, मथुरा, झांसी और हाथरस समेत कई जनपदों में हत्या की कोशिश, लूट, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट जैसे 18 से अधिक संगीन मुकदमे दर्ज हैं और यह मुकदमा भी इसी प्रकृति का है। कोर्ट ने इन तमाम पहलुओं को देखते हुए मामले को गंभीर बताया। जमानत पर रिहा करने का पर्याप्त आधार न पाते हुए कोर्ट ने जमानत याचिका को निरस्त कर दिया।