न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
लॉकडाउन के साथ जिलेभर के कल कारखानों की मशीनें थम गई थी। सोमवार को जिला प्रशासन ने व्यापारियों के साथ बैठक की। अब व्यापारी फैक्ट्री संचालन को लेकर मंथन कर रहे हैं। जारी गार्ड लाइन के अनुसार संचालक संचालन की कवायद में जुटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस जिले को उद्योग की नगरी कहा जाता है। यहां दर्जनों की संख्या में फैक्टरियां संचालित होती हैं। लॉकडाउन में व्यापारियों को राहत देने के लिए फैक्टरी संचालन के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिले में दाल उद्योग, हींग कारोबार, रंग गुलाल कारोबार, गारमेंट कारोबार, आचार मुरब्बा, मेटल कारोबार, नमकीन आदि की फैक्टरियां हैं। इस कारोबार का वर्ष में करोड़ों रुपये का टर्नओवर है। लॉकडाउन के बाद कारोबार ठप पड़ गया है।
संचालन में ये आ रहीं दिक्कतें
व्यापारियों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। फैक्टरी में लेबर का रात्रि में रुकना सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। अधिकांश लेबर रात्रि में रुकने को तैयार नहीं हैं। जो रुक रहे हैं, वह डबल चार्ज मांग रहे हैं। कई फैक्टरियों में इतने इंतजाम नहीं हैं कि वह रात्रि में दस लोगों को सुला सकें। दो टाइम का चाय नाश्ता भी चाहिए। माल आवागमन और लोडिंग के लिए पल्लेदार का सहयोग नहीं ले सकते हैं। कुछ बड़े उद्यमी तो यह सोच रहे हैं कि दस लेबर के सहयोग से फैक्ट्री चलाने से अच्छा बंद रखना है।
उद्योगों पर एक नजर
दाल उद्योग --
55 छोटी बड़ी दाल मिलें
1100 क्विंटल का प्रतिदिन टर्नओवर
195 करोड़ रुपये करीब का सालाना टर्नओवर
हींग कारेाबार
50 बड़ी हींग निर्माता फैक्टरियां
100 छोटी हींग फैक्टरियां
23 करोड़ सालाना टर्न ओवर
रंग गुलाल कारोबार
करीब 17 रंग ़गुलाल के कारखाने हैं।
करीब 30 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर।
गारमेंट्स करोबार
250 रेडीमेड गारमेंट इकाइयां।
140 पंजीकृत इकाइयां
110 गैर पंजीकृत इकाइयां
500 करोड़ रुपये सभी यूनिटों का सालाना टर्नओवर ।
50 से 70 तक प्रति यूनिट पर कारीगर कार्य करते हैं।
आचार मुरब्बा उद्योग
22-25 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर
15 पंजीकृत फैक्टरियां
12 लगभग गैर पंजीकृत फैक्टरियां
मेटल उद्योग
125 पंजीकृत मेटल यूनिट
100 से ज्यादा गैर पंजीकृत यूनिट
20-25 लाख प्रति यूनिट वार्षिक टर्नओवर।
50-60 प्रतिवर्ष यूनिटों का कारोबार।