हाथरस। मनरेगा से होने वाले विकास कार्यों में जिला पिछड़ता जा रहा है लेकिन जिले के अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से ही नहीं ले रहे हैं। हालात यह हैं कि चुनाव के बाद संगठित हुई 278 ग्राम पंचायतों में पूरा मार्च माह बीत जाने के बावजूद जिले के विकास विभाग के अधिकारी ग्राम पंचायतों के खातों का संचालन नहीं करा पाए हैं। जिससे मार्च माह की समीक्षा में जिला मनरेगा की रेटिंग में और लुढ़क सकता है।
मनरेगा से होने वाले विकास कार्यों में जिला काफी पिछड़ा हुआ है। जनवरी माह की समीक्षा में जहां जिला 68 वे पायदान पर था तो माह फरवरी की समीक्षा में यह 69वें पायदान पर पहुंच गया, लेकिन विकास विभाग उन 278 ग्राम पंचायतों में भी अभी तक खाते खुलवाकर विकास कार्य शुरू नहीं करा पाया है।
हाल ही में पंचायत उपचुनाव में ग्राम पंचायत सदस्यों का कोरम पूरा होने के बाद अस्तित्व में आई हैं, जिससे जिले की रेटिंग और नीचे पहुंचने के आसार बढ़ गए हैं, क्योंकि अन्य जनपदों में मनरेगा का कार्य कराने के लेकर विकास विभाग के अधिकारी काफी सक्रिय हैं।
जिले के विकास विभाग के अफसरों की यह संगठित ग्राम पंचायतों में मार्च माह में भी काम शुरू नहीं करा पाने की नाकामी का खामियाजा आने वाले माह की समीक्षा बैठक में सामने आ सकता है। बताते हैं कि इस स्थिति पर शासन ने भी कड़ी नाराजगी जताई है और जिले के अधिकारियों का स्पष्टीकरण तलब कर लिया है। इस कार्रवाई को भी काफी समय बीत चुका है।
बावजूद इसके स्थिति में कोई सुधार नहीं है। लिहाजा विभाग में मनरेगा की इस खराब हालत के लिए जिम्मेदार अफसर और कर्मियों पर कार्रवाई होने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
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मनरेगा में काम कराए जा रहे हैं। मार्च माह की रेटिंग आने के बाद यह पता चले कि हमारे जिले से अन्य कितने जिलों ने अधिक पैसा खर्च किया है।
- जावेद अख्तर जैदी, सीडीओ
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