न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशन में जनपद न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह प्रथम के आदेशानुसार कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर अलीगढ़ जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों को विधिक जानकारी दी गई। अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव चेतना सिंह ने की।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन में दिए गए निर्देशों के आलोक में उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जिला कारागार में निरुद्ध ऐसे विचाराधीन बंदी, जिनके मामलों में सात वर्ष तक की सजा का प्राविधान है, उनको 60 दिन की अंतरिम जमानत पर रिहा किया जा रहा है। ऐसे बंदी अपना प्रार्थना पत्र जिला कारागार से अग्रसारित कराकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हाथरस को भिजवा सकते हैं और इसका लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
अब तक जनपद हाथरस से संबंधित 147 विचाराधीन बंदियों को इस आदेश के अनुपालन में 60 दिन की अवधि की अंतरिम जमानत पर रिहा किया जा चुका है। उन्होंने बंदियों से उनके अधिवक्ताओं के संबंध में जानकारी की और बंदियों को अवगत कराया कि यदि उनके मुकदमे में पैरवी के लिए अधिवक्ता नही है तो वह एक प्रार्थना पत्र कारागार अधीक्षक के माध्यम से संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रार्थना पत्र देकर नि:शुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या से लिए कोई भी व्यक्ति सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन देकर विधिक सहायता प्राप्त कर सकता हैै। सचिव ने बंदियों को यह भी अवगत कराया कि प्राधिकरण की ओर से प्रत्येक माह जिला कारागार में जेल लोक अदालत का आयोजन किया जाता है, जिसमें बंदियों के छोटे-छोटे वादों का निस्तारण किया जाता है। जो भी बंदी अपने वाद को जेल लोक अदालत के माध्यम से कराना चाहते हैं, वह अपने वाद को जेल लोक अदालत के लिए नियत कराकर लोक अदालत का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।