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हाथरस : अनुसूचित जाति की किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले को आजीवन कारावास की सजा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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अनुसूचित जाति की एक किशोरी का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले एक युवक को विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दूसरे आरोपी को कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोप से दोषमुक्त कर दिया है, लेकिन उसे अपहरण का दोषी मानते हुए पांच साल कैद की सजा सुनाई है। इन दोनों को अर्थदंड भी देना होगा। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सादाबाद कोतवाली में 14 जनवरी 2012 को एक किशोरी के पिता ने यह तहरीर दी कि वह अनूसूचित जाटव जाति का है। उसकी बेटी, जिसकी उम्र करीब 14 साल की होगी, वह अपनी मां को नौ जनवरी को निकट के गांव में रजिस्टर देने गई थी। तहरीर के मुताबिक जब यह किशोरी रिक्शे में बैठकर वापस आ रही थी और वह बंबे पर आई तो रास्ते में विष्णु ने इस किशोरी से कहा कि उसे उसकी मां बुला रही है।
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विष्णु इस किशोरी को रिक्शे से उतारकर मोटरसाईकिल से आगरा की ओर बहला-फुसला कर अपहरण कर ले गया। उसके बाद वह 14 जनवरी 2012 को बिसावर चौकी के पास छोड़ गया। इस तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया और इस किशोरी का चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया।
इस मामले में पुलिस ने विवेचना की। इसमें विष्णु के अलावा शिव कुमार उर्फ भोला का नाम भी प्रकाश में आया। विवेचनाधिकारी ने विवेचना के उपरांत दोनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) त्रिलोकपाल सिंह के न्यायालय में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मुख्य आरोपी विष्णु को किशोरी को बहला-फुसलाकर अपहरण करने के अलावा दुष्कर्म करने के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट की धारा 3 (2)(5) का दोषी माना है। कोर्ट ने उसे धारा 363 आईपीसी में पांच साल की कैद, धारा 376 आईपीसी में दस साल और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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उसे अर्थदंड भी देना होगा। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। दूसरे आरोपी शिव कुमार उर्फ भोला को कोर्ट ने धारा 376 व एससी-एसटी एक्ट की धारा 3( 2) (5) के अपराध में दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने उसे धारा 363 आईपीसी में पांच साल की कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे भी अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। कोर्ट के आदेश के अनुसार कुल जुर्माने की अधिरोपित धनराशि में से आधी धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी दिनेश यादव ने पैरवी की। संवाद
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