हाथरस : मेला श्रीदाऊजी महाराज परिसर में सजतीं दुकानें। संवाद
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
ब्रज क्षेत्र का लक्खी मेला श्री दाऊजी महाराज 110 साल पुराना है। 1912 में हाथरस तहसील में तैनात श्यामलाल ने इसकी शुरूआत कराई थी। बताते हैं कि उस समय श्यामलाल का बेटा बीमार हो गया था। उन्हें यह सपना आया था कि वह किला स्थित मंदिर श्री दाऊजी महाराज में पूजा अर्चना कराएं और मेले का आयोजन कराएं तो उनका बेटा स्वस्थ हो जाएगा।
इसके बाद उन्होंने इसका आयोजन कराया तो उनका बेटा स्वस्थ हो गया। तब से लगातार यह मेला जारी है। कोरोना काल में जरूर दो साल मेले का आयोजन नहीं हुआ। 31 अगस्त से शुरू होकर यह मेला 20 सितंबर तक चलेगा। मेले का आयोजन स्थल किला राजा दयाराम व मंदिर श्री दाऊजी महाराज का काफी ऐतिहासिक महत्व है और यह अंग्रेजों से वर्ष 1818 में हुई जंग का साक्षी है। संवाद
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है मेला
हाथरस। यह मेला सांप्रदायिक सद्भाव का भी प्रतीक है। मेला स्थल पर एक तरफ दाऊजी महाराज मंदिर है तो दूसरी ओर काले खां की मजार है। मंदिर पर धर्म ध्वज फहराया जाता है तो मजार पर चादर भी चढ़ाई जाती है। देवछट के दिन दो सितंबर को इस मेले का औपचारिक रूप से उद्घाटन होगा। संवाद