न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हींग की गुणवत्ता परखने के लिए अभी तक हाथरस में प्रयोगशाला स्थापित नहीं हुई है। इस कारण उद्यमियों को हींग की गुणवत्ता की जांच बाहर जाकर करानी पड़ रही है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रयोगशाला के लिए सोसायटी भी बन गई है, फिर भी जगह नहीं मिल रही है।
हाथरस की हींग की महक देश-विदेश तक है। खेदजनक पहलू यह है कि शहर में हींग की गुणवत्ता की जांच नहीं हो रही है। हींग को प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद में भी शामिल कर लिया। इस के साथ हींग की इकाइयों की संख्या करीब 200 पहुंच गई है।
इसके साथ हींग उद्यमियों की सोसायटी बन गई है। इसके बाद भी अभी तक हींग की प्रयोगशाला के लिए जगह नहीं मिली सकी है। इस कारण हींग को तैयार करने के बाद उसकी गुणवत्ता जांच के लिए उद्यमियों को आगरा, दिल्ली, अहमदाबाद जाना पड़ रहा है। संवाद
हमें हींग की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता है। इससे समय खराब होता है। साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। ओडीओपी में शामिल होने के बाद भी अभी प्रयोगशाला का इंतजाम पर्याप्त नहीं है।
-राजेश अग्रवाल, हींग उद्यमी
जब से हींग ओडीओपी में शामिल हुई है, तब से हींग की इंकाइयों में इजाफा हुआ है। हींग को तैयार करने के इसकी गुणवत्ता की जांच के लिए आगरा व दिल्ली जाना पड़ता है। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। -अनिल शर्मा, हींग उद्यमी
हींग की प्रयोगशाला के लिए एक समूह का गठन भी हो गया है। इसके लिए 10 प्रतिशत राशि भी एकत्रित हो गई है। अभी तक प्रयोगशाला नहीं बनने से हींग की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए आगरा, दिल्ली और अहमदाबाद जाना पड़ता है।
-मनोज अग्रवाल हींग उद्यमी
हींग की प्रयोगशाला के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। इस कारण प्रयोगशाला के बनाने में दिक्कतें आ रही है। जगह की तलाश जारी है। जल्द से जल्द प्रयोगशाला बनाने के प्रयास जारी है।
-अजिलेश कुमार, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र