न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
बदलते मौसम में वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। चिकित्सकों ने मौसम में बदलाव के हिसाब से खानपान और रहन-सहन के प्रति सावधानी बरतने की हिदायत दी है।
दिन के समय धूप निकलने के दौरान उमसभरी गर्मी और रात के तापमान में गिरावट के साथ मौसम का बदलता मिजाज सेहत के लिहाज से नुकसानदायक साबित हो रहा है। दिन-प्रतिदिन करवट बदलते मौसम में सेहत के प्रति लापरवाही बरतने के चलते बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।
मौसमी और संक्रामक बीमारियों के साथ-साथ वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रहा। सरकारी और निजी अस्पतालों के वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में मरीजों की भीड़ इसकी तस्दीक कर रही हैं। एकाएक वायरल बुखार के मरीजों की भीड़ बढ़ने से चिकित्सक भी हैरान व परेशान हैं।
सुबह आठ बजे ओपीडी की शुरुआत से पहले ही अस्पतालों में मरीजों की भीड़ देखने को मिल रही है। इनमें शहर और ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग वायरल बुखार का इलाज कराने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को वायरल बुखार अपनी चपेट में ले रहा है। सुबह होते ही अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की कतारें लग रही हैं। संवाद
मरीजों का दर्द
दो दिन से बुखार आ रहा है। दवा लेने आए हैं। सुबह से 12 बज गए, भीड़ अधिक होने के कारण नंबर आने में देरी हो रही है।
-ओमवीर सिंह, मरीज
मौसम में आए बदलाव के कारण सर्दी व बुखार की शिकायत हो गई है। उसी की दवा लेने के लिए जिला अस्पताल आई हूं।
-ऊषा, मरीज
सीने में सर्दी से दर्द हो रहा है। गांव में दवा ली, उससे कोई फायदा नहीं हुआ तो अब अस्पताल से दवा लेने आई हूं।
-महारानी, मरीज
पूरे शरीर में सर्दी से दर्द हो रहा है। मौसम बदलने पर ठंड लग गई है, उसी की दवा लेने के लिए लाइन में लगकर अपनी बारी आने का इंतजार कर रही हूं।
-परवीन, मरीज
ऐसे करें बचाव
-घर और आसपास सफाई का ध्यान रखें।
-नालियों में गंदा पानी और कूड़ा जमा न होने दें।
-वायरल बुखार के लक्षण दिखने पर मरीज को परिवार के सदस्यों से अलग कमरे में रखें।
-बुखार ज्यादा होने पर डिहाइड्रेशन हो सकता है। ऐसे में मरीज को मौसमी फलों के जूस जैसे तरल पदार्थों का सेवन कराना चाहिए।
-तले-भुने व देर से हजम होने वाले भोजन से परहेज करें। हल्का व सुपाच्य भोजन करें।
-पानी को उबालकर व छानकर पीएं
-चिकित्सक की सलाह के बिना मरीज को कोई भी दवाई न दें।
-इस दौरान पूरी नींद लेना जरूरी है।