मुकेश बाबू शर्मा
सहपऊ । सहपऊ नगर पंचायत को अंग्रेजों ने सात जनवरी 1859 को नगर पंचायत का दर्जा दिया था। लगभग 163 वर्ष पहले जब इस कस्बे को नगर पंचायत दर्जा दिया गया तो यह कस्बा शक्कर के बूरे और नील की खेती के साथ-साथ कपड़े का बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र था। इसके पास ही बने जलेसर रोड रेलवे स्टेशन पर दूसरे शहरों से माल आता था। यहां पर म्यंमार की राजधानी रंगून से कपड़ा एवं बंग्लादेश की राजधानी ढाका से रेशम के कपड़े थोक में आते थे।
नगर पंचायत का पहला चुनाव सन 1919 में हुआ था। जिसमें लोगों ने हाथ खड़ा कर सेठ चंदन बाबू को नगर पंचायत अध्यक्ष चुना था। अब तक कुल 17 चेयरमैन हुए हैं। इसके अलावा एक कार्यवाहक चेयरमैन भी रहे हैं। दो महिलाएं क्रमश: चन्द्रवती दिवाकर और पद्मावती वार्ष्णेय भी नगर पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। सबसे लंबा कार्यकाल पंडित रोशनलाल शर्मा का रहा, कुल सात वर्ष। सबसे छोटा कार्यकाल सेठ भानु प्रकाश का रहा, लगभग एक माह। सेठ भानु प्रकाश के बाद होतीलाल को वरिष्ठ सदस्य होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने कार्यवाहक चेयररमैन बनाया था।
नगर पंचायत के इतिहास में कोई भी राजनीतिक दल का प्रत्याशी नहीं जीत पाया है। सभी निर्दलीय प्रत्याशी की जीते हैं। 1972 से लेकर अब तक दो वित्तपोषित इंटर कॉलेज ही बन पाए हैं। युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। अंग्रेजों के जमाने में नील की खेती होती थी, जो अब नही है। स्वास्थ्य सेवाएं भी नाम मात्र ही हैं। यातायात के संसाधन भी न के बराबर हैं। उद्योग धंधे भी नही हैं। कस्बा आर्थिक रूप से भी पिछड़ा हुआ है।
नगर पंचायत में 10 वार्ड हैं। सीमा विस्तार के बाद नगर पंचायत में चार गांव बढ़े हैं। जिनमें नगला सुखराम, नगला बादाम, तकिया एवं नगला मेवा हैं। सन 2017 में यहां 7300 वोटर थे, जिनकी संख्या अब दस हजार के पार हो चुकी है। गौर हो कि कस्बा को नगर पंचायत का दर्जा तो सन 1859 में मिल चुका था। इससे पहले अंग्रेजों के द्वारा नियुक्त बख्शी ही कस्बे के मुखिया हुआ करता था। नगर पंचायत दर्जा मिलने के छह दशक बाद कस्बा में पहला चुनाव सन 1919 मार्च में हाथ उठाकर कराया गया था। संवाद
1-मार्च 1919 से 1924 तक सेठ चंदन बाबू
2-अप्रैल 1924 से 1929 तक पन्नालाल वर्मा
3-मई 1929 से 1934 तक डालचंद वर्मा
उक्त तीनों चेयरमैन हाथ उठाकर चुने गए थे। पहला चुनाव जुलाई 1934 में हुआ।
4-जुलाई 1934 से 1939 तक सेठ सतीश चंद शाह
5-अगस्त 1939 से 1944 तक ठा0 महावीर शाह
6- मार्च 1952 से ला0 भानु प्रकाश एक महीने तक रहे, इसके बाद होतीलाल कार्यवाहक चेयरमैन।
7-वर्ष 1952 से 1957 तक सुनहरी लाल आजाद (निर्विरोध)
8-जून 1957 से 1964 तक पंडित रोशन लाल शर्मा सात वर्ष तक
9- जुलाई 1964 से 1979 तक ठा. निहाल शाह
10-अगस्त 1974 से 1979 तक कालीचरन शर्मा
11-सितंबर 1979 से 1984 तक रामकिशन तीन वर्ष शासन व्यवस्था
12-अक्तूबर 1989 से 1994 तक ठा.जुगेंद्र पाल सिंह
13-अक्तूबर 1994 से 1999 तक नवीन प्रकाश शुक्ला
14-नबंवर 2000 से 2005 तक चंद्र्रवती देवी-दो साल तक
15-अक्तूबर 2007 से 2012 पद्मावती देवी
16-अक्तूबर 2012 से 2017 तक भगवती प्रसाद
17-दिसंबर 2017 से अब तक विपिन वशिष्ठ चेयरमैन हैं