इस साल प्रदेशभर में बारिश औसत से काफी कम हुई है। अगस्त महीने के आखिर और सितंबर के शुरुआती दिनों में हुई बारिश ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के धान के किसानों को बड़ी राहत दी, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बादल रूठे रहे।
यहां के कई जिले भयंकर सूखे की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के हाल ही में सितंबर महीने तक हुई बारिश के जारी आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश में हाथरस सबसे सूखा रहा। जबकि सबसे कम बारिश वाले जिलों में हाथरस का पड़ोसी जिला मथुरा दूसरे और आगरा तीसरे नंबर पर है। गौतमबुद्ध नगर का स्थान चौथा है। बीते पांच साल में यह पहली बार है जब जिले में इतनी कम बारिश हुई है।
विभाग की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के मुताबिक एक जून से 30 सितंबर तक महज 251.5 मिमी बारिश ही हुई है जबकि तीन माह में हाथरस में बारिश का औसत 625.4 मिमी है। मथुरा में 260.7 मिमी, आगरा में 273.7 मिमी और गौतमबुद्धनगर में 290.1 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है। हालांकि सूरत-ए-हाल इससे पहले भी अच्छा नहीं था। जिले में एक जून से अगस्त के महीने तक औसत बारिश का आंकड़ा 502 मिलीमीटर बारिश का है। साल 2012 में एक जून से 31 अगस्त तक 367.60 मिमी बारिश हुई।
साल 2013 में यह आंकड़ा बढ़कर 439 मिमी बारिश तक पहुंच गया। साल 2014 में जिले को सूखे का सामना करना पड़ा है और बादलों की बेरुखी के कारण केवल 199 मिमी बारिश ही हो सकी। साल 2015 में इसमें कुछ सुधार हुआ और 239.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। बीते साल भी हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी, लेकिन जुलाई महीने में हुई 384 मिमी बारिश के बदौलत यह आंकड़ा 501.3 मिमी बारिश तक पहुंच गया। इस साल बीते साल के मुकाबले एक तिहाई बारिश भी नहीं हुई है। इस बार एक जून से 31 अगस्त तक केवल 177.5 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है जो औसत 502.2 मिमी बारिश के आंकड़े से 65 फीसदी कम थी।