प्रस्ताव पास होने के बाद भी ठेका अधर में
13 मार्च को नगर पालिका बोर्ड की बैठक में पहली बार 3×6 फीट साइज के 1000 कियोस्क लगाने का प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके तहत 210 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से पालिका कोष में शुल्क जमा होना तय किया गया था। यह ठेका पालिका के 550 ऑक्टागोनल पोलों के लिए उठना था। हालांकि, प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन शहर में अवैध रूप से होर्डिंग्स लगाने का काम बिना रुकावट जारी है।
वसूली का खेल, पालिका को धेला नहीं
नगर पालिका का मौजूदा कार्यकाल हो या पिछला, छोटे विज्ञापनों में राजस्व की चोरी का खेल लगातार चल रहा है। विज्ञापन एजेंसियां शहरभर के पोलों से लाखों रुपये का कारोबार कर रही हैं, जबकि नगर पालिका की झोली में एक रुपया भी नहीं पहुंच रहा।
बिजली के खंभों पर अवैध कब्जा
बिजली के खंभों पर भी विज्ञापन माफिया का कब्जा है। एक खंभे का 250 से 300 रुपये का किराया वसूला जा रहा है, जबकि दो खंभों के बीच लगे दर्जनभर फ्लैक्स से मासिक 2,500 रुपये तक की अवैध वसूली हो रही है।
पेंसिल पोल से दृष्टिबाधित हो रहे वाहन चालक
सड़क किनारे लगे 10×20 साइज के बड़े साइड होर्डिंग्स (पेंसिल पोल) भी बिना अनुमति लगा दिए गए हैं। ये होर्डिंग्स चालकों की नजर का दायरा प्रभावित करते हैं, जिससे आए दिन मोड़ और चौराहों पर दुर्घटनाएं हो रही हैं।