न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में मनरेगा के कार्यों की जिम्मेदारी शासन के निर्देशों को दरकिनार कर दी गई है। शासन स्तर से श्रम रोजगार उपायुक्त व स्वत: रोजगार उपायुक्त के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। जिले में स्वत: रोजगार (एनआरएलएम) के उपायुक्त की तैनाती भी की जा चुकी है, लेकिन मनरेगा के उपायुक्त की जिम्मेदारी सौंपने में शासनादेश की अनदेखी की गई है। शासन स्तर से उपायुक्त श्रम रोजगार व उपायुक्त स्वत: रोजगार को रिक्त पदों का प्रभार दिए जाने के लिए निर्देश भी जारी किए गए हैं।
शासन ने अपने निर्देश में कहा है कि जिले में उपायुक्त श्रम रोजगार व उपायुक्त स्वत: रोजगार में से एक पद रिक्त होने की दशा में रिक्त पद का प्रभार जिला विकास अधिकारी को दिया जाए। जिला विकास अधिकारी का पद रिक्त होने की स्थिति में उपायुक्त श्रम रोजगार या उपायुक्त स्वत: रोजगार का जो भी पद रिक्त हो, उसका प्रभार उपायुक्त श्रम रोजगार/उपायुक्त स्वत: रोजगार में से जो भी तैनात हों, उसको दिया जाए।
उल्लेखनीय है कि शासन स्तर से पिछले दिनों उपायुक्त स्वत: रोजगार अशोक कुमार की तैनाती की गई है। इसके बाद चार्ज का वितरण किया गया है, लेकिन इसमें शासन के आदेश की अनदेखी की गई है। मनरेगा का चार्ज यहां परियोजना निदेशक डीआरडीए को दे रखा है, जबकि शासनादेश के अनुरूप डीडीओ को मनरेगा उपायुक्त का चार्ज देना चाहिए और डीडीओ के पद रिक्त की स्थिति में उपायुक्त एनआरएलएम को देना चाहिए, लेकिन यहां आदेश को दरकिनार कर जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर यदि कोई भिन्न स्थिति बनती है तो इस संबंध में कार्रवाई शासन के पूर्व अनुमोदन के साथ की जाए।