न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना महामारी के दौर में ऑक्सीजन की किल्लत से जिले में भी कई लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी। उनके परिजन अभी भी बेहद गमजदां हैं। अब उन्होंने जब यह सुना है कि सरकारों द्वारा यह कहा जा रहा है कि ऑक्सीजन की किल्लत से तो कोई मौत ही नहीं हुई, वह गुस्से में भी हैं। उनका कहना है कि यह सरासर झूठ बोला जा रहा है।
डॉक्टर के पैर तक पकड़ लिए थे, नहीं मिली ऑक्सीजन
स्थानीय आवास-विकास कॉलोनी निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता मधुवाला विमल की जान कोरोना काल में चली गई थी। उनके पति वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि 24 अप्रैल को जब उनकी पत्नी की तबियत जब ज्यादा खराब हो गई तो उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल किया गया। वहां कुछ घंटे उपचार के बाद ऑक्सीजन न होने की बात कहकर दूसरी जगह ले जाने को कह दिया गया। इस पर वह उन्हें गंभीर हालत में शहर के दो अन्य अस्पतालों में ले गए, लेकिन वहां भी ऑक्सीजन न होने की बात कही गई। जिला अस्पताल में भी लेकर गए, लेकिन वहां भी ऑक्सीजन न होने की बात कही गई। उन्हें आगरा ले जाया गया, लेकिन एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचते-पहुंचते अगले दिन 25 अप्रैल को उनकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। अपना दर्द बयां करते हुए वीरेंद्र कुमार ने बताया कि डॉक्टर के पैर तक पकड़ लिए थे, लेकिन उनकी पत्नी को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई और इसकी वजह से उनकी पत्नी की जान चली गई।
छह घंटे में लगाए थे सात अस्पतालों के चक्कर
सासनी के गांव खेड़ा फिरोजपुर निवासी सतीश कुमार के 75 वर्षीय पिता सोवरन सिंह की मृत्यु भी कोरोना काल में ही हुई। सतीश कुमार का कहना है कि 29 अप्रैल को जब उनके पिता की तबियत बिगड़ी तो वह अपने पिता को हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लेकर आए। वहां उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिली। उसके बाद वह अलीगढ़ रोड एक अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां भी ऑक्सीजन की अनुलब्धता बताई गई, फिर आगरा रोड स्थित एक कोविड अस्पताल में लेकर आए। वहां भी ऑक्सीजन न होने की बात कहकर उन्हें अस्पताल से लौटा दिया गया। इसके बाद वह फिर जिला अस्पताल आए, लेकिन स्थिति जस की तस रही। तदुपरांत सीएचसी मुरसान पहुंचे, लेकिन वहां भी ऑक्सीन नहीं मिली। उसके बाद जब वह अपने पिता तो मथुरा के एक अस्पताल में ले जा रहे थे तो उनके पिता ने दम तोड़ दिया। उनका कहना है कि छह घंटे के अंदर उन्होंने सात अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिली। यदि ऑक्सीजन उनके पिता को मिल जाती तो शायद उनके पिता आज जिंदा होते। उनका कहना है कि यह सराकर झूठ बोला जा रहा है कि ऑक्सीजन की किल्लत से कोई मौत नहीं हुई।