न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
केंद्र सरकार द्वारा उद्योगों को दोबारा से पटरी पर लाने के लिए राहत पैकेज की घोषणा की गई है। यहां के काफी उद्यमी यह मान रहे हैं कि यह पैकेज उद्योगों के लिए फायदेमंद होगा, लेकिन अभी उद्योग-धंधे पटरी पर नहीं आ पा रहे। इसकी वजह यह है कि कुछ फैक्टरियों में मजदूर नहीं आ पा रहे। कुछ में मजदूर आ रहे हैं तो फैक्टरी संचालकों को कच्चा माल नहीं मिल रहा। कई फैक्टरी संचालक तो जानबूझकर ज्यादा मजदूरों को बुलाकर रिस्क नहीं लेना चाह रहे। हालांकि काफी फैक्टरियां संचालित हो गई हैं, लेकिन सप्लाई की कड़ी टूट गई है।
इसकी अहम वजह यह भी है इस शहर में हींग, दाल, रंग, गुलाल, रेडीमेड गारमेंट्स, अचार मुरब्बा जैसे उद्योग ही हैं, जोकि मध्यम अथवा कुटीर उद्योग हैं। आसपास के जिले अलीगढ़ और आगरा रेड जोन में शामिल हैं। ऐसे में आवागमन प्रभावित हो रहा है और यहां के उद्योग-धंधे रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे। इस सिलसिले में उद्योग नगरी संघ के सचिव प्रदीप गोयल का कहना है कि यहां मजदूर तो आसपास के क्षेत्र के हैं। ऐसे में यहां काम तो काफी फैक्टरियों में शुरू हो चुका है, लेकिन अभी चेन सप्लाई टूट गई है, इसलिए कामकाज रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा।
हाथरस का उद्योग एक नजर में
-40 छोटे-बड़े दाल मिल, 130 करोड़ सालाना टर्नओवर
-50 बड़ी हींग निर्माता फैक्टरियां,100 छोटी हींग फैक्टरी, लगभग 23 करोड़ सालाना टर्न ओवर
-17 करीब रंग गुलाल के कारखाने, करीब 30 करोड़ रुपये सालाना टर्न ओवर
-140 पंजीकृत इकाइयां, 110 गैर पंजीकृत इकाइयां हैं रेडीमेड गारमेंट्स की, 500 रुपये करोड़ रुपये सभी यूनिट का सालाना टर्न ओवर
-22 से 25 करोड़ रुपये सालाना टर्न ओवर है अचार मुरब्बा उद्योग का, 15 पंजीकृत फैक्टरियां पंजीकृत, 12 गैर पंजीकृत फैक्टरी
-125 करीब पंजीकृत मेटल यूनिटें, 100 से ज्यादा गैर पंजीकृत यूनिट, 50 से 60 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का कारोबार।
औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार दो दर्जन से अधिक फैक्टरियां हैं, जिसमें से अधिकांश फैक्टरियां संचालित हैं। मात्र दो, तीन फैक्टरी ही बंद हैं। फैक्टरियों में कोई प्रवासी मजदूर नहीं है, जिससे कामकाज में दिक्कत हो। हालांकि मजदूर कम आ रहे है। सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए काम हो रहा है।
-देवेंद्र मोहता, अध्यक्ष हाथरस औद्योगिक आस्थान संघ
हमारे शहर में औद्योगिक इकाइयों में अधिकांश मजदूर आसपास के क्षेत्र के हैं। इस कारण अधिकांश कारखाने संचालित हो गए हैं। सप्लाई चेन टूटी होने के कारण कामकाज रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। आसपास के जिलों में हॉटस्पॉट है। इस कारण माल की आवाजाही भी नहीं हो पा रही है।
-प्रदीप गोयल सचिव हाथरस मर्चेंट्स चेंबर।
गारमेंट उद्योग पूरी तरह से बंद है। रेडीमेड गारमेंट को लेकर कोई गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। रविवार को पीएम के संबोधन के बाद नई गाइडलाइन पर उद्योग को संचालन को लेकर एसोडसिएशन के पदाधिकारियों से वार्ता की जाएगी।
-नीरज अग्रवाल, गारमेंट उद्यमी
शहर में जगह-जगह व्यर्थ की बैरिकेडिंग के चलते सामान के लिए मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। हॉटस्पॉट में दुकानें बंद होने के कारण कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस कारण उद्योग संचालित करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
-नितिन वार्ष्णेय, मसाला उद्यमी।