पोस्टमार्टम हाउस पर विलाप करतीं मृतक रामपाल की पत्नी
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परिवार की सुख-शांति के लिए डौली ने सोमवार का व्रत रखा था। पति की लंबी उम्र की कामना की थी। पोस्टमार्टम हाउस पर पति रामपाल को याद कर बिलखतीं डॉली अपनी किस्मत को कोस रही थीं। उनका कहना था कि केवल पति ही जीने का सहारा थे, अब वे कैसे रहेंगी।
बदहवास डॉली को परिजनों ने संभालने का प्रयास किया, लेकिन कोई उनके दुख को कम नहीं कर सका। पास मौजूद दोनों बच्चे अपनी मां को रोता-बिलखता देख मायूस खड़े हुए थे। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर मृत रामपाल अपने पीछे पत्नी व सात व नौ साल के दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं। डॉली के पिता अनिल कुमार निवासी रुहेरी ने बताया कि 20 साल पहले उनकी बेटी की शादी रामपाल से हुई थी। शादी के बाद से ही रामपाल हाथरस आ गए थे तथा यहां किराये पर रहने लगे। इसके बाद कांशीराम टाउनशिप के ब्लॉक सात में रहने लगे। पिता अनिल ने बताया कि उनकी बेटी व दामाद पर शुरू से परेशानियां हावी रहीं।
डॉली ने बताया कि शादी के बाद उनके बेटी हुई, जिसकी अचानक मौत हो गई थी। वे इस गम से उबरी ही थीं कि कुछ साल बाद घर में ही दीपक से जल गई थीं, जिसमे उनका एक हाथ बेकार हो गया था। शादी के काफी समय बाद दोनों बेटे हुए। रामपाल मेहनत-मजदूरी कर परिवार को पाल रहे थे और दोनों बच्चों को पढ़ा रहे थे, लेकिन समय को कुछ और ही मंजूर था। फिर से पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं।
गंभीर रूप से झुलसे राकेश की हालत गंभीर थी। जिस समय उन्हें जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया, वह तड़प रहे थे और स्ट्रेचर पर भी नहीं लेट पा रहे थे। उन्हें संभालने के लिए छह लोग लगे। कोई पैर पकड़ रहा था तो कोई हाथ। जैसे-तैसे स्टाफ ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया। राकेश के पैर और बायां हाथ बुरी तरह झुलस गया था। पेट व पीठ पर भी जले के निशान थे। गंभीर हालत में परिजन उन्हें अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज ले गए।
इमरजेंसी में बेहोश पड़े रहे राजू
तीसरे मजदूर राजकुमार उर्फ राजू हादसे के समय नीचे थे। उनके केवल हथेली पर हलके झुलसने के निशान थे। हादसे के करीब दो घंटे बाद उन्हें परिजन घबराहट की शिकायत पर इमरजेंसी लेकर पहुंचे, जहां उन्हें भर्ती किया गया। इमरजेंसी में भर्ती राजू शाम तक बेहोशी की अवस्था में रहे। उनसे घटना की जानकारी करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे कुछ नहीं बोले।