न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
बिटिया के बहुचर्चित मामले में कड़ी सुरक्षा के बीच चारों आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में लाया गया। न्यायालय में आरोपी रामू की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं अब इस मुकदमे में सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तिथि नियत की गई है।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 14 सितंबर को चंदपा थाना क्षेत्र के एक गांव में एक अनुसूचित जाति की बिटिया के साथ हुई वारदात के बाद जमकर बवाल हुआ था। बिटिया ने 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस मामले में उसके ही गांव के चारों आरोपियों संदीप, रामू, रवि और लवकुश के खिलाफ सीबीआई ने यहां विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) की कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया था।
इन चारों पर अनुसूचित जाति की इस युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने का आरोप है। इस मामले की जांच सीबीआई की डिप्टी एसपी सीमा पाहुजा की अगुवाई वाली टीम ने की थी। शुक्रवार को इसी न्यायालय में इस मुकदमे की सुनवाई थी। ऐसे में चारों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अलीगढ़ जेल से यहां लाया गया। कोर्ट में उनकी पेशी हुई। एक आरोपी की जमानत के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र भी दिया गया था।
इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से मुन्ना सिंह पुंढीर पैरवी कर रहे हैं। अब दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं हरीश कुमार शर्मा व लक्ष्मीकांत सारस्वत ने भी आरोपियों की ओर से अपना वकालतनामा दाखिल कर दिया। इस केस में सीबीआई की जांच अधिकारी सीमा पाहुजा भी करीब एक बजे कोर्ट में पहुंचीं। सीबीआई के अधिवक्ता भी वहां थे। रामू की जमानत याचिका पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने बहस की। साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। रामू की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मुकदमे में अगली सुनवाई अब 11 फरवरी को होगी।
सीआरपीएफ की सुरक्षा के बीच कोर्ट आया बिटिया का भाई
हाथरस। इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई को लेकर कोर्ट में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। पुलिस ने कोर्ट के बाहर सुबह से ही घेराबंदी कर ली। इधर, बिटिया का भाई भी सीआरपीएफ की सुरक्षा के बीच न्यायालय पहुंचा। सुनवाई के बाद वह भी कोर्ट से वापस चला गया।
परिजनों को पुलिस ने नहीं आने दिया आरोपियों के पास
हाथरस। आरोपियों के परिजन व परिचित सुबह से ही कोर्ट परिसर के बाहर एकत्रित हो गए थे। जैसे ही पुलिस की गाड़ी आरोपियों को अलीगढ़ जेल से लेकर आई तो वह उनसे मिलने के लिए आतुर दिखे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पास नहीं आने दिया। ऐसे में परिजन दूर से ही आवाज देकर और इशारों में बात करते नजर आए।