न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरसान (हाथरस)।
स्पोर्ट्स स्टेडियम में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। जिला प्रशासन इन्हें बसों से उनके जिलों तक पहुंचा रहा है। मंगलवार को जब कुछ कामगारों से बात की गई तो काम धंधा छूटने का दर्द उनकी जुबां पर आ गया। किसी ने यह सोचा नहीं था कि उन्हें इस हालत में वापस फिर अपने घर पर जाना पड़ेगा। हर किसी को अपने घर जाने की जल्दी थी और सभी का यही कहना था कि वहीं जाकर सोचेंगे कि आगे क्या करना है।
- मैं मुंबई में मजदूरी का काम करने के लिए एक ठेकेदार के साथ गया था। अब लॉकडाउन में फिर अपने घर जा रहा हूं। चलते-चलते मंगलवार को अपने अन्य साथियों के साथ ट्रक व अन्य वाहनों के माध्यम से हाथरस तक आ गया हूं। अभी अपने घर जाना है। पहले वहां पहुंच जाऊं, तब तय करूंगा कि आगे क्या करना है। - मुशर्रफ, बदायूं
- हरियाणा में मजदूरी का काम करने के लिए गया था। काम बंद हो जाने के बाद अपने अन्य साथियों के साथ शहर जा रहा हूं। हरियाणा से करीब 90 किलोमीटर पैदल चलने के बाद टेंपो मिला। उसके बाद अन्य वाहन के माध्यम से यहां तक आ गया हूं। काम धंधा तो छूट ही गया है। अब पता नहीं आगे क्या होगा। - जयमल सिंह, औरंगाबाद लखीमपुर खीरी
- अपने परिवार के लोगों के साथ जयपुर में मजदूरी करने के लिए गई थी। लॉकडाउन होने के बाद लोगों ने काम देना बंद कर दिया, जिसके चलते परिवार व अन्य लोगों को वहां से अपने शहर को जाना पड़ है। - शबाना, बरेली
- अपने अन्य साथियों के साथ राजस्थान मजदूरी करने के लिए गया था। लॉकडाउन के बाद काम मिलना बंद हो गया, जिसके चलते वहां पर आए दिन परेशानी होने लगी। अब हाथरस के प्रशासन द्वारा उन्हें अपने शहर भेजा जा रहा है। - सुरेंद्र, लखीमपुर
- अपने पति व बच्चों के साथ राजस्थान में मजदूरी करने के लिए ठेकेदार के माध्यम से गई थी, लॉकडाउन के बाद ठेकेदार ने काम देना बंद कर दिया। कुछ दिन खाने के लिए दिया गया। लेकिन बाद में वह परेशान करने लगा, जिसके चलते परिवार के साथ अपने गांव जा रही है। - शशि, महोली सीतापुर