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हाथरस : झुलसा के बाद आलू में अब सता रहा पाले का डर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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तापमान गिरने से आलू की फसल पर अब पाला जमना शुरू हो गया है, जिससे फसल में नुकसान होने की संभावना है। आलू उत्पादक किसानों के लिए हर साल पाला और ब्लाइट (बीमारी) मुसीबत लेकर आती है। ठंड बढ़ने के साथ इनका प्रकोप खेतों में नजर आने लगता है। इसे अगर नजरअंदाज कर दिया तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को एहतियात बरतने की राय के साथ ही दवा आदि का छिड़काव करने की सलाह भी दे रहे हैैं।
इस बार जिले में 48 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में आलू की फसल बोई गई है। शीतलहर को देखकर आलू उत्पादक किसान अब ऊपर वाले से मौसम साफ होने की दुआ कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक आलू उत्पादक किसानों को फसल पर ध्यान देने का सुझाव दे रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामपलट का कहना है कि आलू की फसल को पाले से बचाने के लिए खेतों में नमी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।
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अगर खेत में ब्लाइट (झुलसा रोग) की संभावना है तो मैंकोजेब दवा का सवा किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। यदि खेत में झुलसा रोग लग चुका है तो इसमें मैंकोजेब और मेटालैक्सिल के कंपोजिशन (मिश्रण) वाली दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए। यह दवा दो ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग की जाए। इस हिसाब से एक किलोग्राम दवा का उपयोग एक हेक्टेयर आलू में करना चाहिए।
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