न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शक्ति की प्रतिरूप और प्रकृति की अनमोल रचना नारी को अपनी क्षमता का अहसास हो तो वह सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ सकती है। शहर में कई महिलाएं हैं जिन्होंने इन वाक्यों को सच साबित कर दिखाया है। किसी महिला ने अपने पिता का मान बढ़ाया तो किसी ने जिले का मान बढ़ाया है। खुद को मजबूत बनाया। उस दौर में महिलाएं चौखट के भीतर घूंघट की ओट से झांक रही तब शहर की कुछ महिलाओं ने समाज को आइना दिखाने की ठान ली। मजबूती के साथ आगे बढ़ी अपने मुकाम को हासिल भी किया।
2011 की घटना के बाद समाज को दिला रहीं न्याय
शहर के नवलनगर निवासी प्रिया गुप्ता के पिता की कस्बा मेंडू में 2011 में हत्या हो गई थी। उस समय वह लॉ की द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। इसी के साथ उन्होंने मन बना लिया कि पिता के हत्यारे को सजा दिलाने के साथ समाजसेवा करेंगी। हत्यारे को अजीवन कारावास की सजा दिलाई। अब समाजसेवा कर समाज को नया आइना दिखा रहीं हैं। अब तक वह करीब ढाई सौ महिलाओं को विभिन्न मामलों में न्याय दिला चुकी है। करीब सौ परिवारों में विवादों का निस्तारण कर आपस में मिला चुकी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी से कमजोर नहीं है। वह डरें नहीं। हर क्षेत्र में तरक्की कर रही है। मुकाम को हासिल करने के लिए शिक्षा एक चाबी हैं।
जिले में पहली महिला एडीजीसी बनीं प्रतिभा
शहर की प्रतिभा राजपूत सामाजिक कार्य करते हुए पहली एडीजीसी क्रिमिनल का पद संभाल रही हैं। साथ ही जूडिशियल की तैयारी भी कर रही है। जब से हाथरस जिला बना है पहली एडीजीसी महिला हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को विभिन्न मामलों में त्वरित न्याय मिले। उनका समाज को संदेश है। महिलाएं चारदीवारी से बाहर आएं। तभी वह अपने अधिकारों को हासिल कर सकती हैं।
शैलजा बन रहीं बेटियों की सारथी, जुटी मुकाम में
शहर से सटे चंदपा गांव की सामाजिक कार्यकर्ता भवतोष मिश्र की तीन संतानों में से सबसे बड़ी बेटी शैलजा मिश्र सरस्वती विद्यालय की छात्रा हैं। उनके पिता भवतोष मिश्र पर्यावरण संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बेटी बचाओ अभियान के सूत्रधार हैं। पिता से मिली सीख के बाद बेटी ने मुकाम हासिल करने की ठान ली। छोटी उम्र में कन्या भ्रूण हत्या, बेटियों से भेदभाव दहेज प्रथा, को लेकर संवेदनशील हैं। वह अध्ययन के साथ समाज में फैली सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में जुट गई हैं। उनके द्वारा गोष्ठी कर पर्यावरण संरक्षण, सांप्रदायिक सौहार्द, नारी उन्नयन, युवा सशक्तीकरण, व्यवस्थित यातायात के साथ बेटियों को पढ़ाने और उनकी जीवन शैली को बदलने में जुट गई है। स्कूल कॉलेजों में जाकर मार्ग दर्शन करती हैं।