न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
बिटिया की याद आते ही पिता की आंखें नम हो जाती हैं। उनका कहना है कि बिटिया उनका बहुत ख्याल रखती थी। हमेशा यह कहती थी कि पापा बहुत सीधे हैं।
घर के अन्य सदस्यों से भी यही कहती थी कि पापा का ख्याल रखना। जब अस्पताल में गंभीर हालत में थी, तब भी मुझे याद करती थी। जब वह दुनिया से अलविदा हुई, तब भी थोड़ी देर पहले ही मैंने उसे देखा था। उनका कहना है कि बेटी के जाने का गम मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।