न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों में सरकार ने बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है, लेकिन जिले में अभी तक चंद स्कूलों को छोड़कर ज्यादातर स्कूलों के बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं।
जिले में करीब 1235 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व संविलियन विद्यालय हैं। इनमें लगभग 1.66 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। गर्मी की छुट्टियों के बाद 16 जून से विद्यालय खुल चुके हैं। दो माह से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अभी तक बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं। स्कूलों में मनमाने तरीके से पढ़ाई हो रही है। कई विद्यालयों में तो पाठ्य योजना भी नहीं बनाई गई है। ऐसी स्थिति में बुनियादी शिक्षा कैसे मजबूत होगी और विद्यार्थी होनहार कैसे बनेंगे, इसका अंदाजा स्वत: लगा सकते हैं।
यूं तो शासन परिषदीय स्कूलों को निजी स्कूलों के मुकाबले बनाना चाहता है, लेकिन उसकी मंशा पर शिक्षा विभाग की लापरवाही से पानी फिरता नजर आ रहा है। कुछ बच्चे पुरानी किताबों से अपनी पढ़ाई को पूरा कर रहे हैं, लेकिन कुछ बच्चे बिना किताबों के ही पढ़ने को मजबूर हैं। संवाद
पुस्तकों के जल्द से जल्द वितरण का निर्देश
हाथरस। यह जिला ऐसा न कर पाने वाले प्रदेश के उन जिलों में शामिल है, जहां अभी तक बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई हैं। इसे लेकर प्रदेश के पाठ्य पुस्तक अधिकारी की ओर से बीएसए बेसिक शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी करके पुस्तकों के जल्द से जल्द वितरण का निर्देश दिया गया है, अन्यथा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। संवाद
चंद किताबों को भी नहीं पहुंचाया गया स्कूलों तक
जिला मुख्यालय पर पिछले करीब 15 दिन पहले कक्षा एक की एक, कक्षा दो की एक, कक्षा तीन की दो, कक्षा चार की एक, कक्षा छह की दो और कक्षा सात की तीन किताबें आईं थीं। इनका कुछ स्कूलों में वितरण कराकर इतिश्री कर दी गई। इन किताबों को ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी), संकुल और फिर विद्यालय स्तर पर पहुंचाने की जिम्मेदारी विभागीय लोगों की है।
हकीकत बयां करने से डर रहे शिक्षक
सादाबाद, सहपऊ, सासनी, हसायन, सिकंदराराऊ, हाथरस और मुरसान विकास खंड के ज्यादातर स्कूलों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची हैं। इस बात को दबी हुई आवाज में तो शिक्षक कह रहे हैं, लेकिन खुलकर कोई भी सामने आने को तैयार नहीं है, क्योंकि उन्हें खुलकर सामने आकर बात कहने पर विभागीय कार्रवाई का डर है।
सभी किताबों के आने के इंतजार में जिम्मेदार
विभागीय सूत्रों का कहना है कि चंद किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने पर काफी खर्च आएगा, इसलिए जो शेष किताबों आने से रह गई हैं, उनके आने का इंतजार किया जा रहा है। कुछ किताबें मुख्यालय पर आ भी गई हैं, उनके सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने की बात कही जा रही है।
हमारे यहां प्राइमरी में 160 और जूनियर में 270 बच्चे पंजीकृत हैं। शासन से मिलने वाली नि:शुल्क किताबों अभी तक प्राप्त नहीं हुई हैं। किसी तरह से व्यवस्था कराकर बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं।
-रामनिवास दुबे, प्रधानाचार्य डीआरबी इंटर कॉलेज।
कुछ कक्षाओं की एक-एक किताब आई हैं। कक्षा आठ की तो एक भी किताब नहीं आई है। ऐसे में बच्चे बिना किताबों के कैसे पढ़ाई कर पाएंगे। ऊपर से ही किताबें अभी तक न आने की बात बताई गई है।
-शिवकुमार शर्मा, प्रधानाचार्य रामबाग इंटर कॉलेज।
जैसे-जैसे हमें किताबें प्राप्त हो रही हैं, वैसे-वैसे बीआरसी, संकुल और फिर स्कूलों तक पहुंचाया जा रहा है। अभी तक हमें मात्र 40 फीसदी ही किताबें लखनऊ से प्राप्त हुई हैं। 10 लाख के सापेक्ष दो बार में 4 लाख 20 हजार किताबें मिली हैं। पहले राउंड में 1 लाख 98 हजार किताबें और दूसरे राउंड में दो लाख किताबें प्राप्त हुई हैं। इनका सत्यापन चल रहा है। इन किताबों को भी स्कूलों तक पहुंचाए जाने की व्यवस्था की जा रही है।
-संदीप कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी