संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
मंडी में कार्य कर रहे आढ़तियों का लाइसेंस जारी होते ही तीन लाख रुपये का बीमा हो जाता है। मंडी में कार्य के दौरान अनहोनी पर मंडी प्रशासन द्वारा बीमा दिया जाता है। लेकिन, जागरूकता के अभाव में मंडी के आढ़तियों को जानकारी नहीं है। अब कृषि कानून की वापसी के बाद बाहरी कारोबारी भी ऑनलाइन लाइसेंस ले रहे हैं। ऑनलाइन सिस्टम होने से कारोबारियों को मंडी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
उल्लेखनीय है कि हाथरस मंडी में वर्तमान में दो सौ गल्ला व दो सौ फल सब्जी की आढ़त है। इन कारोबारियों को मंडी प्रशासन द्वारा परिसर में कार्य करने का लाइसेंस जारी किया जाता है। हर साल जून में लाइसेंस का नवीनीकरण भी किया जाता है। मंडी में कार्य कर रहे अधिकांश आढ़तियों को यह नहीं पता कि लाइसेंस जारी होने के बाद वह मंडी के बेड़े में शामिल हो गए हैं।
यदि मंडी में कार्य दौरान किसी कारोबारी के साथ अनहोनी होती है। उसे मंडी प्रशासन द्वारा जांच कर सभापति को रिपोर्ट देंगे। उसके बाद बीमा की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मंडी प्रशासन द्वारा जैसे कृषकों को मुख्यमंत्री खेत खलियान दुर्घटना बीमा दिया जाता है। उसी तरह कारोबारियों को भी तीन लाख रुपये का बीमा उसके वारिस को दिया जाएगा।
बाहर करोबार करने वाले सौ लोग ले रहे लाइसेंस
कृषि कानून की वापसी के बाद मंडी से बाहर किराना, लकड़ी, दाल मिल आदि का कारोबार करने वाले करीब सौ लोग लाइसेंस ले रहे हैं। इन कारोबारियों को लाइसेंस व अन्य काम के लिए मंडी कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। क्योंकि मंडी हाईटेक होने के साथ ऑनलाइन हो गई है।
इस मामले में मंडी सचिव यशपाल सिंह का कहना है कि यदि मंडी में कार्य के दौरान किसी आढ़तियां के साथ अनहोनी हो जाती है। उसके परिवार को कृषकों की तरह तीन लाख रुपये की शासन स्तर से सहायता का प्रावधान है।