न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सादाबाद (हाथरस)
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर एंटी रेबीज वैक्सीन का टोटा हो गया है। बंदर, कुत्ते के काटने से घायल मरीजों को रोज बिना इंजेक्शन लगवाए ही लौटना पड़ता है। पूछने पर स्वास्थ्य कर्मी रोज आज-कल बोलकर टहलाते हैं। लोगों को मजबूरी में मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदकर लगवाना पड़ रहा है। ऐसे में गरीब तबके के लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
कस्बा, देहात में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक है। सीएचसी में अधिकतर कुत्ते काटने के मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने आते हैं। लेकिन कई दिन से वैक्सीन खत्म है और मरीजों को लौटाया जा रहा है। मरीज पूछते हैं कि कब तक वैक्सीन आ जाएगी तो कहा जाता है कि तीन-चार दिन में आकर पता कर लेना।
दरअसल, सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन मुफ्त लगाई जाती है, जबकि मेडिकल स्टोर पर करीब 350 रुपये की एक डोज मिलती है। एक मरीज को तीन डोज लगवानी होती है। ऐसे में करीब एक हजार रुपये खर्च होते हैं। इसलिए खर्चे से बचने के लिए लोग सरकारी अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। सरकारी अस्पताल में रेबीज की उपलब्धता ऐसे ही रहती है। अक्सर यहां एंटी रेबीज के इंजेक्शन खत्म हो जाते हैं। संवाद
- चार दिन से लगातार अस्पताल के चक्कर लगा रही हूं लेकिन रेबीज के इंजेक्शन नहीं मिले। पूछने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है। - भूरी देवी, मढ़ाका
- तीन दिन हो गए अस्पताल के चक्कर लगाते लगाते लेकिन कुरसंडा और सादाबाद में कहीं भी रेबीज का इंजेक्शन नहीं है। बाहर से लाने के लिए पैसे नहीं है। - अमित कुमार, कुरसंडा
- पांच किमी दूर से आई हूं, यहां रेबीज के इंजेक्शन नहीं है। कुत्ता काटने की वजह से इंजेक्शन लगवाना था। पूछने पर कोई बता भी नहीं रहा। बाजार में एक खुराक 300 से ज्यादा की आती है। - मखमूलन, पुसेनी
- 20 किलोमीटर दूर से आया हूं। कल भी आया था, आज के लिए बोल दिया था। बृहस्पतिवार को भी रेबीज के इंजेक्शन नहीं मिले। ठंड में आने-जाने में भी परेशानी हो रही है। - बलवीर सिंह, बिसावर
- जिले में डिमांड भेज दी गई है। फोन से भी पूछा गया है। दो दिन मेें रेबीज के इंजेक्शन आने को कहां गया है। शनिवार तक इंजेक्शन आने की उम्मीद है। - डॉक्टर प्रकाश मोहन, एमओआईसी