न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सादाबाद में इरेजर (रबर) को निगलने के एक माह बाद किशोर की मौत की घटना ने अभिभावकों और मनो चिकित्सकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। चिंता यह है कि आखिर क्यों बच्चे अपने साथ होने वाली छोटी-बड़ी घटनाओं को परिवार से छिपाते हैं।
अगर सादाबाद के मोहल्ला व्यापारियान निवासी 16 वर्षीय अजान ने रबर को निगलने की बात समय रहते परिजनों को बताई होती तो शायद उसे बेहतर उपचार मिल जाता और उसकी जान बच सकती थी, लेकिन डांट के संकोच में उसने यह बात छिपाए रखी और यह घटना उसके लिए जानलेवा बन गई।
इस घटना को लेकर अभिभावकों और चिकित्सकों ने अपनी अपनी राय दी है। बच्चों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार जरूरी है, जिससे बच्चे अपने मन की बात का परिवार में साझा कर सकें।
बच्चे बहुत ही नाजुक होते हैं, उन्हें शुरू से जिस माहौल में डाला जाए, उसी तरह से ढ़ल जाते हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार करना चाहिए, जिससे कि वह अपनी हर बात उनके साथ शेयर कर सकें।
-डॉ. प्रमोद कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ
अभिभावक अपने बच्चों के साथ अगर मित्रवत व्यवहार रखेंगे तो वह बच्चे अपनी सभी बातों को उनके साथ साझा करेंगे, इसलिए सभी माता-पिता को बच्चों के साथ एक दोस्त की तरह से व्यवहार करना चाहिए, ताकि वह अपनी परेशानी को साझा कर सकें।
-डॉ. पीके श्रीवास्तव, वरिष्ठ चिकित्सक
बच्चे बहुत ही नाजुक होते हैं। अगर उनसे हम कड़ाई से पेश आएंगे तो वह अपनी बातों को छिपाने लगते हैं, इसलिए हमें बच्चों के साथ बहुत ही अच्छा व कोमल व्यवहार करना चाहिए, ताकि वह हमसे किसी भी बात को छिपाएं नहीं।
-राधा माधव शर्मा, सचिव बार एसोसिएशन
यह बात बिल्कुल सही है कि अगर हम बच्चों से मित्रता वाला व्यवहार रखेंगे तो वह अपनी सभी बातों को हमारे साथ साझा कर सकेंगे, इसलिए मेरा सभी माता-पिता से अनुरोध है कि वह अपने बच्चों से मित्रवत व्यवहार रखें, ताकि वह तुरंत अपनी परेशानी को बता दें।
-मनोज कुमार शर्मा, अभिभावक