-20 हजार की अनुमति, ढाई लाख की भीड़ जुटी। पुलिसकर्मी लगाए थे मात्र 69
-एलआईयू की तरफ से दी गई 50 हजार से ज्यादा की भीड़ जुटने की रिपोर्ट की भी अनदेखी हुई
-स्थानीय प्रभारी सहित चार इंस्पेक्टर ही मौजूद थे, दमकल भी नहीं लगाई गई थी
-सुबह से ही भीड़ जुड़ने लगी थी, फिर भी नहीं चेते पुलिस और प्रशासनिक अफसर
-एसआईटी व न्यायिक जांच में भी माना गया कि भीड़ को देखते हुए पर्याप्त नहीं थे इंतजाम
ऐसे हुआ था हादसा
गतवर्ष दो जुलाई को सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव फुलरई मुगलगढ़ी में भोले बाबा उफ साकार विश्व हरि का सत्संग समाप्त होने के बाद जैसे ही भीड़ ने निकलना शुरू किया, तभी भोले बाबा का काफिला निकलने लगा। इस दौरान सेवादारों ने भीड़ को डंडों से धकियाकर रोक दिया। कुछ लोग भोले बाबा की चरण रज लेने के लिए गैलरी में पहुंच गए। व्यवस्था बिगड़ गई और भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में महिलाएं और बच्चे बुरी तरह कुचलते चले गए। मौके पर चीख-पुकार मच गई।
न्यायिक आयोग ने 500 लोगों के दर्ज किए थे बयान
इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने बदइंतजामी की रिपोर्ट दी थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की टीम को गठित किया। आयोग की टीम ने यहां मौके पर आकर घटना स्थल, जिला अस्पताल परिसर, सीएचसी सिकंदाराराऊ का निरीक्षण किया। यहां तक कि टीम के सदस्यों ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए। इसके बाद करीब 500 लोगों को नोटिस देकर बयान देने के लिए तलब किया। एसआईटी रिपोर्ट के बाद ही तत्कालीन एसडीएम, सीओ, इंस्पेक्टर सहित कुछ अन्य पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया था।