रोजाना 40 से 50 लोग हो रहे घायल
जिले में प्रतिदिन बंदरों के हमलों में 40 से 50 लोग घायल हो रहे हैं। जिला अस्पताल में सितंबर में 1,250 लोगों ने बंदर के काटने पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई। अक्तूबर में अब तक 660 लोग इंजेक्शन लगवा चुके हैं। कुत्तों के बाद बंदर काटने के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।
शासन के आदेश, फिर भी कार्रवाई नहीं
शासन ने दो अप्रैल 2026 को मानव-बंदर संघर्ष रोकने के लिए अंतरिम कार्ययोजना लागू की थी। जिलाधिकारियों को नगर निकायों के माध्यम से बंदरों के ठिकाने चिह्नित कराने, हेल्पलाइन जारी करने और उन्हें पकड़ने की योजना बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद जिले में बंदरों को पकड़ने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
इनकी है जिम्मेदारी
बंदरों को पकड़ने के लिए हर जिले में एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया है। उस कमेटी के अध्यक्ष जिलाधिकारी हैं। इनके अलावा कमेटी के सदस्यों में पुलिस आयुक्त द्वारा नामित प्रतिनिधि, प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, डीएम द्वारा नामित वन्य जीव विशेषज्ञ एनजीओ, सदस्य-सचिव नगर पालिका परिषद ईओ हैं।
बंदरों के हमले में हुईं मौत
- 9 अक्तूबर 2026 को मोहल्ला खंदारी गढ़ी में 17 साल के आरिफ की बंदरों के हमले में छत से गिरकर मौत हो गई।
- 17 सितंबर 2026 को हाथरस जंक्शन में रेलवे रोड पर 50 साल के देवी किशोर बंदरों के हमले में छत से गिर गए थे। अलीगढ़ में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
- 7 अप्रैल 2026 को जलेसर रोड अक्रूर कॉलोनी में बंदरों से बचने के प्रयास में 18 वर्षीय शिवानी की छत से गिरकर मौत हो गई थी।
- 18 फरवरी 2026 में सासनी के गांव बांधनू में गुड्डी देवी (50) की भी बंदरों के हमले में छत से गिरकर मौत हुई थी।