न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
ग्राम पंचायत बसई बावस में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के विरोध में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने सहायक चकबंदी अधिकारी (एसीओ) द्वारा खेतों की पक्षपात के आधार पर गलत कीमत लगाकर और अनियमित इरादे से काटे गए चकों की प्रक्रिया पूर्ण करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने अविवादित एसीओ के माध्यम से चक निर्माण कराए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम पंचायत बसई बावस में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। सहायक चकबंदी अधिकारी ने चकों का निर्माण कर दिया है। आकार पत्र 23 भाग एक का वितरण साजिशन टुकड़ों में धीरे-धीरे किया जा रहा है। पर्चा 23 भाग-1 पर पुरानी तारीख लिख दी गई है। आज तक भी गांव में पूरे पर्चा 23 भाग एक नहीं बांटे गए हैं।
ग्राम पंचायत बसई बावस के छह मजरे हैं। चकबंदी में खेतों की कीमत खेतों की मेड़ पर जाकर नहीं लगाई गई है। कीमत लगाने के बाद गांव के सभी गरीब किसानों से बैठकर न सलाह मशविरा नहीं किया गया। गांव मजरा एवं कार्यालय में न बैठकर अलग प्राइवेट जगह एवं अपने निजी निवास पर बैठकर चकों का निर्माण किया गया है।
उन्होंने कहा कि गांव और मजरों में ज्यादातर गरीब अनुसूचित और पिछड़ी जाति के लोग रहते हैं। धन न देने की वजह से उनके चक खराब, अनियमित और उड़ान चक बना दिए गए हैं। इस कारण अधिकतर किसान आमरण अनशन करने के लिए आमादा हैं। ग्रामीणों ने कहा कि एसीओ ने गांव के चकबंदी कमेटी के अध्यक्ष व प्रधान और सदस्यों में से किसी को भी बैठक में नहीं बुलाया।
फर्जी हस्ताक्षर कराकर उन्होंने चकबंदी प्रक्रिया को पूर्ण किया। ग्रामीणों ने मांग की कि 30 अक्तूबर तक उक्त चकबंदी प्रक्रिया को सही तरीके से पूर्ण किया जाए, अन्यथा एक नवंबर को भूख हड़ताल की जाएगी। इस मौके पर श्रीपाल, विपिन कुमार, प्रेमपाल सिंह, सुरेशचंद्र, शंकरपाल, उमेश सिंह, संतोष सिंह, राजकुमार, जयपाल आदि मौजूद थे। संवाद