मासूम की मौत का कारण जानने के लिए एक्सरे का परीक्षण करते चिकित्सक आरबीएस रूपेश कुमार व डाॅ. एके सि
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हसायन (हाथरस)।
क्षेत्र के गांव छीतूपुर में सोमवार की सुबह ढाई महीने के एक बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि बच्चे को गांव के टीकाकरण केंद्र पर तीन टीके लगवाए गए थे। इसके बाद बच्चे की बांह में सूजन आ गई और उसे तेज बुखार आया। इसी वजह से उसकी मौत हुई है, जबकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बच्चे की मौत टीकाकरण की वजह से नहीं हुई है। हो सकता है कि किसी जहरीले जंतु ने उसे काट लिया होगा। परिजनों ने गमगीन माहौल में बच्चे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों ने मौके पर आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी खरी-खोटी सुनाईं।
गांव छीतूपुर निवासी कार्तिक (ढाई माह) पुत्र वीरू को नौ जुलाई को आशा कार्यकर्ता की सलाह पर गांव के टीकाकरण केंद्र पर तीन टीके लगवाए गए। दो टीके उसकी जांघ और एक बाजू पर लगाया गया। कार्तिक के परिजनों ने बताया कि टीकाकरण के बाद से ही उसकी बाजू पर सूजन आ गई थी और उसका स्वास्थ्य खराब होने लगा। इस दौरान उन्होंने एएनएम व आशा कार्यकर्ता से सूजन नहीं जाने का कारण पूछा तो उन्होंने बर्फ की मालिश करने की सलाह दी। ऐसा करने के बाद भी बच्चे की सूजन नहीं गई तो उन्होंने फिर से एएनएम व आशा कार्यकर्ता को इसकी जानकारी दी। परिजनों ने बताया कि सीएचसी पर चिकित्सक ने बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण किए बिना ही सीरप व गोली देकर घर भेज दिया। सीएचसी से मिली दवा से भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ और सोमवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
बच्चे की मौत से परिवार में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही सीएचसी से चिकित्सक डॉ. एके सिंह, बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सक रूपेश कुमार, सहायक नेत्र परीक्षण अधिकारी बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व एएनएम महेश्वरी देवी उसके घर पहुंच गए। परिजनों ने दोहराया कि टीकाकरण में लापरवाही से ही बच्चे की जान गई है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विजय आनंद का कहना है कि बच्चे की मौत का कारण टीकाकरण नहीं है। टीकाकरण के दौरान सूजन आने के बाद किसी भी परिजन ने उन्हें कोई सूचना नहीं दी। हो सकता है कि बच्चे को किसी जहरीले जंतु ने काट लिया होगा। इसकी वजह से उसकी मौत हुई है। शनिवार को बच्चे के परिजन उसको लेकर आए तो उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा भी दी गई थी। संवाद