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हाथरस : बेटियां भी कर सकती हैं पितरों का श्राद्ध

सार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस बेटियां और महिलाएं जब पिता या पति का अंतिम संस्कार कर सकती हैं तो उनका श्राद्ध भी कर सकती हैं।आकाशवाणी हुई कि श्राद्ध का समय निकल रहा है।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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बेटियां और महिलाएं जब पिता या पति का अंतिम संस्कार कर सकती हैं तो उनका श्राद्ध भी कर सकती हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका श्राद्ध जरूरी होता है। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्माएं तृप्त होती हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है। इधर, पितृ अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए शहर और क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए जाएंगे।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि आम तौर पर श्राद्ध पुत्र या पौत्र करता है। यदि दोनों लोग नहीं हों तो घर की महिलाएं पितरों का श्राद्ध तर्पण कर सकती हैं। गरुण पुराण के अनुसार बड़े या छोटे पुत्र के अभाव में पत्नी, कन्या व पुत्रवधू भी श्राद्ध कर सकती है। उन्होंने बताया कि रामायण में भगवान श्रीराम सीता और लक्ष्मण वनवास में पितृ पक्ष के दौरान राजा दशरथ का श्राद्ध करने गया जा पहुंचे। लक्ष्मण श्राद्ध का सामान लेने शहर चले गए।
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वहां उन्हें देरी हो गई। आकाशवाणी हुई कि श्राद्ध का समय निकल रहा है। उसी समय सीता जी को राजा दशरथ की आत्मा के दर्शन हुए, जो उनसे पिंडदान के लिए कह रही थीं। उसके बाद सीता जी ने गाय को साक्षी मानकर मिट्टी का पिंड बनाकर पिंडदान किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा से किया गया तर्पण ही श्राद्ध है। यदि किसी को व्यक्ति को अपने माता पिता की मृत्यु की तिथि न मालूम हो तो वह अमावस्या को श्राद्ध कर सकते हैं। अमावस्या को काफी संख्या में श्रध्दालु गंगा घाटों के लिए भी रवाना होंगे। संवाद
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