हाथरस। हाथरस जिले के 33 गांवों के लोगों की मांग है कि हाथरस जलेसर मार्ग का चौड़ीकरण के किया जाए नव निर्माण। इस मार्ग से हर रोज करीब बीस हजार चार पहिया वाहन पड़ौसी जिलों व शहर की डगर तय करते हैं। लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग ने करीब 37 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। अब शासन से इस मार्ग के लिए मात्र 1.79 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह धनराशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
हाथरस-जलेसर मार्ग की बात करें तो हाथरस से जलेसर, फिरोजाबाद और सिकंदराराऊ आदि नगरों की दूरी तय की जाती है। हाथरस सीमा में 16 किलोमीटर की दूरी को तय करने में चार पहिया वाहन से करीब 50 मिनट का समय लगता है, क्योंकि मार्ग में गहरे-गहरे गड्ढे हैं। इस कारण वाहन बेहद धीमी गति से चल पाते हैं। दो पहिया वाहनों में सफर करने वालों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है। कई बार हादसे हो जाते हैं। संवाद
यह गांव बसें हैं हाथरस-जलेसर मार्ग पर
नयाबांस, नगला खान, जैनी गढ़ी, गंगचौली, नगला इमलिया, लाड़पुर, नगला झंडू, बामन नगरा, बलना, भोपतपुर, भिलोखरी, मिर्जापुर, कैमार, ऐंहन, सिकंदरपुर, परसारा, कुम्हरई, पैकवाड़ा, अफोया, लाखनू, सूरजपुर, बेरगांव, कोका, तिरपरस, अलिया नगरा, सूजिया, सुजान, तुरसैन के अलावा आसपास काफी गांव हैं। इन गांवों के लोगों को शहर की दूरी तय करने के लिए इसी मार्ग से जाना पड़ता है। साथ ही पड़ोसी जिले एटा, जलेसर और फिरोजाबाद के लिए भी इस मार्ग से गंतव्य तक की दूरी तय करते हैं। इस मार्ग से आवागमन में कम समय लगता है, क्योंकि यह मार्ग शॉर्ट कट है।
आलू के सीजन में रहती है बड़े वाहनों की आवाजाही
हाथरस-जलेसर मार्ग पर हरी सब्जी व आलू का अधिक उत्पादन होता है। इस मार्ग से कोल्ड स्टोर भी हैं, इसलिए यहां से बड़ी संख्या में ट्रॉला और अन्य भारी वाहन निकलते हैं। यदि इस मार्ग की लीपापोती की गई तो चंद महीनों में यह मार्ग जवाब दे जाएगा, इसलिए इस मार्ग के निर्माण पर सभी को ध्यान देना चाहिए, ताकि लंबे समय तक मार्ग की हालत सही बनी रहे।
इस मार्ग की हालत बहुत खराब है। आए-दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मार्ग की चौड़ाई काफी कम है। मार्ग सिंगल है। इस मार्ग को चौड़ा करते हुए सही तरीके से बनाया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके और गंतव्य की दूरी तय करने में राहत मिल सके।
-प्रेम सिंह, जैनी गढ़ी
हर रोज हाथरस दूध लेकर शहर जाते हैं। इस मार्ग से शहर की दूरी तय करने में जान हथेली पर रखनी पड़ती है।, क्योंकि मार्ग एक तो एकल है। साथ ही इसकी हालत बहुत खराब है। मार्ग में गहरे गहरे गड्ढे हो रहे हैं। कोई ध्यान देने वाला नहीं है।
-राकेश कुमार, नगला इमलिया
इस मार्ग की हालत बहुत खराब है। इस मार्ग पर तांगे के जरिये शहर की दूरी तय करते हैं। मार्ग खराब होने के कारण एक-दो ही सवारी मुश्किल से मिलती है। यदि मार्ग सही हो तो भाड़े में इजाफा हो जाएगा। मार्ग खराब होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
-रूप सिंह, परसारा
इस मार्ग से हर रोज शहर की दूरी तय करते हैं। इस मार्ग पर दो पहिया वाहन पर चलने का मतलब जान जोखिम में डालना है। इस मार्ग को पहले चौड़ा किया जाए। उसके बाद इस मार्ग को अच्छी तरह बनाया जाए, ताकि आसानी से आवागमन हो सके।
-लेखराज शर्मा, बाघऊ
शहर को जोड़ने वाला यह एक ही मार्ग है। इस मार्ग से हर रोज काफी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। इसकी हालत पर कई साल से किसी ने ध्यान नहीं दिया है। इस कारण इस मार्ग पर लगातार सफर करने वालों को दर्द मिल रहा है।
-मुनीश दीक्षित, जलालपुर
हाथरस-जलेसर मार्ग पर सबसे अंतिम गांव भोपतपुर है। हाथरस से भोपतपुर तक की दूरी तय करने में अगर मार्ग सही हो तो बमुश्किल 20 मिनट लगेंगे। अब मार्ग खराब होने के कारण करीब एक घंटे का समय लगता है। दो पहिया वाहन एक साल से ज्यादा नहीं चल पाता है।
-रिंकू पंडित, अफोया
इस मार्ग की अब कई साल बाद सुधि ली गई है। पहले इस मार्ग को चौड़ा किया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके, फिर मार्ग को मोटी परत डालकर बनाया जाए, ताकि मार्ग लंबे समय तक चले। इस मार्ग से फिरोजाबाद, एटा और जलेसर आदि स्थानों के लिए लोग सफर करते हैं।
-योगेंद्र सिंह नगला इमलिया
पूर्व में इस मार्ग के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2021 में 3839. 85 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। इस मार्ग के लिए शासन से बीते दिनों करीब दो करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। इसके लिए अब टेंडर की प्रक्रिया को पूरा कर निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं।
-राजेश निगम, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग