साहब, मौसम ने हमारी पूरी मेहनत नष्ट कर दी और अधिकारी अपने आंकड़ों की जादूगरी दिखा रहे हैं। कम नुकसान दिखाकर हमारे दर्द पर मरहम की जगह नमक छिड़क रहे हैं। ये पीड़ा हाथरस जिले के उन किसानों की है जिन्हें बारिश और ओलावृष्टि के चलते कई बीघा खेती का नुकसान हुआ। दरअसल, जिला प्रशासन के सर्वे में गेहूं का नुकसान 17 से 18 फीसदी बताया है। नियम के अनुसार मुआवजा तभी मिलेगा, जब नुकसान 33 फीसदी या उससे अधिक होगा।
फरौली निवासी अखिलेश कुमार ने बताया कि इस बार उन्होंने 35 बीघा में गेहूं की बुवाई की थी। फसल अच्छी थी, लेकिन अचानक हुई बारिश और तेज हवा के कारण पूरी फसल बिछ गई। दाना हल्का रह गया और गुणवत्ता भी गिर गई। वहीं बरौली निवासी टीकम सिंह ने बताया कि उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर 22 बीघा में गेहूं की फसल उगाई, लेकिन भूसा लायक भी फसल नहीं बची। जिधर देखो, खेत में गेहूं बिखरा है।
फिलहाल सरकारी कागज में नुकसान कम है तो मौजूदा पीड़ित किसान मुआवजे से खुद ही बाहर हो गए। किसानों का दावा है कि जिले में नुकसान 50 फीसदी से भी ज्यादा है। इतना ही नहीं, वर्तमान में जिले के 42,699 किसान करीब 1232.12 करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज के तले दबे हैं।
हाथरस जिले में 17 फीसदी नुकसान का आकलन है। सबसे ज्यादा प्रभावित तहसील सिकंदराराऊ है, फिर भी अगर किसी किसान का नुकसान है तो कृषि विभाग में आवेदन कर सकता है। - धर्मेंद्र सिंह, जिला आपदा प्रभारी, ओसी कलेक्ट्रेट।