न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
न्यायालय ने हत्या के एक मामले में एक आरोपी को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। वर्ष 2011 में जन्माष्टमी के दिन मंदिर में घुसने पर इस दलित की हत्या कर दी गई थी।
आरोप है कि 22 अगस्त 2011 को जन्माष्टमी को रात्रि में राजाराम पुत्र नाथूराम निवासी गुलाब पुर कस्बा पोरा थाना सिकंदराराऊ के गांव पोरा के जानकी मंदिर में भजन-कीर्तन सुनने के लिए गया था। इस दौरान वहां पल्लू ठाकुर पुत्र सुरेंद्र ठाकुर, पिंटू ठाकुर पुत्र कल्लू ठाकुर, सोनू पुत्र गनेश कुमार चौहान वहां मौजूद थे। इन लोगों ने उसे जातिसूचक गालियां देते हुए यह कहा कि वह मंदिर क्यों आया। इसको लेकर कहासुनी हुई तो इन लोगों ने गली में ले जाकर तेज धारदार हथियारों से राजाराम के पूरे शरीर पर वार किए, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना की रिपोर्ट कोतवाली सिकंदराराऊ में मृतक के भाई रामेश्वर ने दर्ज कराई थी।
पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की और आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम योगेंद्र राम गुप्ता के न्यायालय में हुई। कोर्ट ने आरोपी पल्लू ठाकुर पुत्र सुरेंद्र सिंह ठाकुर निवासी पोरा को दोषी मानते हुए उसे धारा 302 सपठित धारा 3 (2)(5) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अर्थदंड नहीं देने पर दोषी को एक साल का अतिरिक्त कारावास और भोगना होगा। आदेश के अनुसार अर्थदंड की पूरी धनराशि मृतक के आश्रितों मृतक की पत्नी, बच्चे, माता-पिता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि धारा 357 (क) दंड प्रक्रिया संहिता के अधीन अतिरिक्त क्षतिपूर्ति की धनराशि मृतक की पत्नी व बच्चों को को उत्तर प्रदेश राज्य से उत्तर प्रदेश पीड़ित क्षतिपूर्ति स्कीम 2014 से दिलाई जाए। इसके लिए मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को संदर्भित किया जाए।