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हाथरस : 26 लाख पौधों से आव-ओ-हवा को शुद्ध करने का दावा

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हाथरस : पौधरोपण की स्थिति देखते डीएफओ। संवाद - फोटो : HATHRAS
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गौरव भारद्वाज
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हाथरस। एक तरफ पराली और पटाखों के प्रदूषण को लेकर देश की राजधानी में सियासत चरम पर है तो दूसरी तरफ जिले में लगाए गए 26 लाख पौधों के दम पर वन विभाग प्रदूषण में कमी आने का दावा कर रहा है।
अब सर्दी की शुरुआत होते ही विभाग ने पौधों को पाले से बचाने के लिए इनकी सिंचाई के इंतजाम शुरू कर दिए हैं, ताकि पौधे सही रहें। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो स्थानों पर प्रदूषण को मापक यंत्र लगा रखे हैं। इनको यदि किसी सार्वजनिक स्थल पर लगाया जाए तो शहर के लोगों को भी पता चलेगा शहर का पर्यावरण कितना शुद्ध है।
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वन विभाग का दावा है कि इन पौधों की हरियाली की बदौलत ही दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चल रहा धुंध का प्रकोप इस बार यहां देखने को नहीं मिला है। यदि हरियाली की इस संपदा को इसी तरह सहेजकर रखा जाता है तो भविष्य में प्रदूषण में कमी के और बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। संवाद
डीएफओ बोले-पौधे ऐसे कम करते हैं प्रदूषण
नीम का पेड़ : ये पेड़ पर्यावरण को साफ रखने में मदद करता है। ये एक तरफ नेचुरल एयर प्यूरीफायर है। वातावरण में मौजूद गंदगी को साफ करता है। हवा में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाता है।
जामुन का पेड़ : जामुन का बीज तो फायदेमंद है, लेकिन इसके अलावा सल्फर व नाइट्रोजन जैसी गैसों को शुद्ध बनाता है।
बरगद का पेड़ : इसकी खासियत यह है कि जितना बड़ा और घना पेड़ होगा, उतनी ही ज्यादा ऑक्सीजन देगा।
अशोक का पेड़ : अशोक का पेड़ भारी मात्रा में ऑक्सीजन बनाकर पर्यावरण में छोड़ता है। इसे लगाने से न सिर्फ ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है, बल्कि ये पेड़ दूषित गैसों को सोखकर शुद्ध बनाता है।
अर्जुन का पेड़ : यह पेड़ न सिर्फ ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि दूषित गैसों को सोखकर शुद्ध बनाता है।
पीपल का पेड़ : पीपल का पेड़ किसी अन्य पेड़ की तुलना में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन का निर्माण करता है। यह पेड़ अपनी पूरी जिंदगी में उतनी ऑक्सीजन बना सकता है, जितनी कई फैक्ट्री भी नहीं बना सकतीं।
शहर में बढ़ते प्रदूषण से लोग अनजान
शहर के आगरा रोड गिजरौली के निकट प्रदूषण मापक यंत्र लगा हुआ है। एक यंत्र सादाबाद में लगा हुआ है। इतना बड़ा जिला होने के बाद मात्र दो प्रदूषण मापक यंत्र लगे हुए हैं। शहर में लगा मापक यंत्र के बारे में तो लोगों को जानकारी नहीं है। यदि यह सार्वजनिक स्थल पर लगा दिए जाएं तो शहर के लोगों को प्रदूषण के बारे में भी पता चल सकेगा। खास बात यह है एयर इंडेक्स की रिपोर्ट एएमयू द्वारा हर माह तैयार की जाती है।
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शासन स्तर से साल दर साल पौधों का रोपण किया जा रहा है। पर्यावरण प्रत्येक पौधे की अहम भूमिका है। विभाग द्वारा सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पौधों का रोपण किया जाता है। नीम, कंजी, अशोक, पीपल आदि के पौधे 26 लाख पौधों का रोपण इस वर्ष किया गया है। सर्दी की शुरुआत के साथ पौधों को पाले से बचाने के लिए सिंचाई का सहारा लिया जाएगा।
-डॉ. सीपी सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी
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