न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
नगर पालिका अध्यक्ष पद अनारक्षित होने पर सभी पार्टियां नए सिरे से बिछात बिसानी शुरू कर दी है। पार्टियां हर हाल में जिताऊ प्रत्याशी पर ही दांव खेलने की सोच रहे हैं। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर लगी हुई है कि भाजपा इस बार पुराने ही प्रत्याशी को मैदान में लाएगी या किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी। अभी तक के माहौल को देखते हुए तो यहीं लग रहा है कि भाजपा पुराने चेहरे को ही वरीयता दे सकती है।
सिकंदराराऊ नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव हमेशा से कांटे का रहा है। यहां जाति फैक्टर काफी हावी रहता है। यहां से पहली बार सरताज अली चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। उसके बाद उनकी पत्नी नसीम सरताज ने महिला सीट हो जाने के बाद जीत हासिल की। इसके बाद भाजपा के विजयभारत कुलश्रेष्ठ निर्वाचित हुए। सामान्य महिला सीट होने पर भाजपा से विपिन वार्ष्णेय की पत्नी वर्षा वार्ष्णेय जीती थीं। इससे पहले इकराम की पत्नी फानूस ने सीट जीती। पिछली एससी सीट से इकराम ने सरोज देवी को अपने दम पर जिताया था।
अब चूंकि सीट अनारक्षित हो गई है तो यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा व्यापारी नेता विपिन वार्ष्णेय पर दांव खेलेगी या किसी नए को मैदान में उतारेगी। अन्य नये संभावित दावेदारों में पंकज गुप्ता बताए जा रहे हैं। इन्हें विधायक वीरेंद्र राना का करीबी बताया जाता है। इसके अतिरिक्त भाजपा नगर अध्यक्ष नीरज वैश्य, गिरीश मोहन गुप्ता, जितेंद्र वार्ष्णेय पिंटू नेता, महिला नेता मीरा माहेश्वरी का नाम प्रकाश में आ रहा है। भाजपा संगठन भी मानता है कि उसे हर हाल में जिताऊ प्रत्याशी मैदान में उतारना है। यहां न विकास मुद्दा है और न हीं प्रत्याशी की विशेषता। यहां पर जाति फैक्टर हमेशा से हावी रहा है। संवाद