न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में अभी तक रक्त अवयव इकाई (ब्लड कंपोनेंट एवं सेपरेशन यूनिट) की शुरुआत नहीं सकी है। शासन ने इसे मई माह के पहले सप्ताह में क्रियाशील करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक इसके उपकरण नहीं भेजे हैं। ऐसे में जब बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों के साथ-साथ डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है और ऐसे मं इन मरीजों को प्लेट्लेट्स की काफी आवश्यकता है तो रोगियों को बाहर जाना पड़ रहा है।
जिले के बागला संयुक्त चिकित्सालय में पिछले एक दशक से ब्लड बैंक हैं, लेकिन यहां केवल रक्त ही मरीजों को मिलता है। रक्त के अवयव जैसे आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेट्लेट्स मरीजों को नहीं मिलते। ऐसे में इमरजेंसी में यहां मरीजों के सामने काफी काफी परेशानी हो जाती है। मरीज को इसके लिए निजी चिकित्सक के यहां जाना पड़ता है या फिर जिले के बाहर। पिछले दिनों शासन ने जिले में रक्त अवयव इकाई के लिए बजट भेजा। इसके तहत यहां ब्लड बैंक में ही अलग से भवन स्थापित करा दिया गया।
शासन ने यह निर्देश दिया कि मई के पहले सप्ताह में इस यूनिट को क्रियाशील कर दिया जाए। अब भवन पूरी तरह से तैयार है, लेकिन इस यूनिट के उपकरण अभी तक नहीं भेजे गए हैं। अभी जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेट्लेट्स के लिए निजी चिकित्सकों या फिर जिले के बाहर ही जाना पड़ रहा है। अभी तय भी तय नहीं है कि कब तक यह उपकरण आ जाएंगे। संवाद
रक्त कंपोनेंट व सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार है। सभी व्यवस्था पूरी कर ली गई हैं। केवल पांच उपकरण आए हैं, सात उपकरणों के आने का इंतजार है। जैसे ही उपकरण आ जाएंगे। वैसे ही यहां यूनिट क्रियाशील हो जाएगी।
-डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल